प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर दायर की गई याचिका बुधवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से कोर्ट में निवेदन किया गया कि वे नए तथ्यों के साथ नई याचिका दायर करना चाहते हैं। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जिस नियम को हवाला दिया जा रहा है, वह नई याचिका में ही दिया जा सकता है। पुरानी याचिका में जो आधार दिए गए थे, उन आधारों पर दूसरे मुकदमों के फैसले हो चुके है।
मुख्य बिंदु:
याचिका वापस लेने का कारण: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ई-अटेंडेंस के लिए बने 'हमारे शिक्षक ऐप' से रोज़ाना उपस्थिति दर्ज कराने में उन्हें गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयाँ आ रही हैं।
याचिका में उठाए गए मुद्दे:
डेटा चोरी और साइबर धोखाधड़ी (Data Leak & Cyber Fraud) की आशंका।
नेटवर्क न होने, सर्वर धीमा होने और स्मार्टफोन में तकनीकी समस्याओं के कारण उपस्थिति दर्ज न हो पाना, जिससे वेतन कटने का खतरा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने यह दलील दी थी कि सरकार यह ऐप एक निजी संस्था से चलवा रही है, जो शिक्षकों का डेटा कलेक्ट कर रही है।
सरकार का पक्ष: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा था कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी सही साबित किया गया है, और 'हमारे शिक्षक ऐप' से डेटा चोरी होने की कोई संभावना नहीं है।
विभाग की प्रतिक्रिया: DPI (लोक शिक्षण संचालनालय) ने कुछ शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी की घटनाओं को स्वीकार किया था और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे।
शिक्षकों की मांग थी कि या तो बायोमेट्रिक मशीन से या पहले की तरह कर्मचारी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराई जाए।