मध्‍य प्रदेश में SIR का काम 99 प्रतिशत पूरा, 13.77 लाख मतदाताओं को साबित करनी होगी पहचान, नहीं मिला 2003 की सूची में रिकॉर्ड

SIR In MP: प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम करीब 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस दौरान 55 जिलों में 13 लाख 77 हजार 775 मतदाता ऐसे मिले हैं, जिनका 2003 की मतदाता सूची में कोई रिकार्ड नहीं है। अब इन मतदाताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे जाएंगे।
 
SIR In MP
SIR In MP Big Update : मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, प्रदेश निर्वाचन आयोग मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में, एक बड़ा खुलासा हुआ है कि राज्य के 13 लाख 77 हजार से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिले हैं। इन सभी मतदाताओं को अब अपनी पहचान और पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने होंगे। इस व्यापक अभियान का 99% काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन इन लाखों मतदाताओं की पहचान सत्यापित करना आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
​आधार-वोटर आईडी लिंकिंग में आई बाधा
​निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में दोहराव और फर्जी मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से वोटर आईडी (इपिक) को आधार कार्ड से लिंक करने का एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया था। मध्य प्रदेश में भी इस काम को युद्धस्तर पर किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह 13.77 लाख मतदाताओं का समूह मुख्य रूप से वे हैं जिनका डेटा आधार से लिंक नहीं हो पाया है क्योंकि 2003 की मतदाता सूची में इनका कोई प्रमाण या रिकॉर्ड नहीं मिला। इसका मतलब है कि या तो इनके रिकॉर्ड पुराने कागजी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे, या फिर वे बाद में मतदाता बने, लेकिन उनके नाम की पुष्टि के लिए आवश्यक ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
​चुनाव आयोग का सख्त रुख: पहचान जरूरी
​मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही इन मतदाताओं के नाम मौजूदा सूची में शामिल हों, लेकिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड की कमी के कारण उनकी पहचान पर संदेह बना हुआ है। इन्हें अपनी पहचान सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा मान्य विभिन्न दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
​“यह प्रक्रिया पूरी तरह से मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर वैध मतदाता का नाम सूची में हो और कोई भी फर्जी या दोहरा नाम न बचे। 2003 के रिकॉर्ड में न होना एक तकनीकी और ऐतिहासिक चुनौती है, जिसका समाधान पहचान के दस्तावेजी प्रमाण से ही किया जाएगा।” - एक वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारी ने बताया।
​वोटर सत्यापन की पूरी प्रक्रिया
​निर्वाचन आयोग ने इन सभी 13,77,000+ मतदाताओं की सूची को संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को भेज दिया है। बीएलओ अब घर-घर जाकर इन मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने को कह रहे हैं।
​स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में शामिल हैं:
​एपिक कार्ड (EPIC)
​आधार कार्ड
​पासपोर्ट
​ड्राइविंग लाइसेंस
​बैंक/पोस्ट ऑफिस पासबुक
​पैन कार्ड
​सरकारी कर्मचारियों का पहचान पत्र
​मनरेगा जॉब कार्ड
​श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड
​पेंशन दस्तावेज
​यदि मतदाता इनमें से कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ होते हैं, तो उनका नाम सूची से हटाया जा सकता है, बशर्ते मतदाता अपनी पात्रता का कोई अन्य ठोस प्रमाण न दे पाएं।
​दोहरे नाम हटाना भी मुख्य लक्ष्य
​आधार लिंकिंग और सत्यापन अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू मतदाता सूची से दोहरे नाम (Dublicate Entries) हटाना है। अक्सर देखा गया है कि एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर या एक ही स्थान पर दो बार दर्ज होता है। आधार से लिंक करने पर ऐसे दोहरे रिकॉर्ड की पहचान करना आसान हो गया है। आयोग का अनुमान है कि इस अभियान के बाद मतदाता सूची में दोहरे और फर्जी नामों की संख्या में भारी कमी आएगी, जिससे चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
​आगामी चुनाव के लिए तैयारी
​प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनाव की घोषणा होने वाली है। ऐसे में निर्वाचन आयोग का यह सत्यापन कार्य बहुत महत्वपूर्ण है। आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि अंतिम प्रकाशित सूची पूर्णतः शुद्ध हो। हालांकि, मतदाता संगठनों और राजनीतिक दलों ने आयोग से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि सत्यापन प्रक्रिया में कोई भी वैध मतदाता गलती से बाहर न हो जाए। यह अभियान चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और आवश्यक कदम माना जा रहा है।

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