अजब MP में गजब घोटाले... कहीं ₹120 का एक लड्डू बंटा, तो कहीं बिजली की दुकान से खरीदा नाश्ता; बोगस बिलों की बेलगाम कहानी
Wed, 23 Jul 2025

मध्य प्रदेश में बीते एक महीने में तीन जिलों शहडोल, डिंडौरी और मऊगंज से ऐसे घोटाले सामने आए हैं, जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. सरकारी कागजों की जादूगरी और अफसरों के भ्रष्ट जुगाड़ ने दिखा दिया कि घोटालेबाजी के मामले में एमपी वाकई गजब है.
शहडोल में पुताई के फर्जी बिल का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि डिंडौरी जिले में एक और हैरान करने वाला घोटाला सामने आया. सरकारें देश-विदेश में नशा मुक्ति और धूम्रपान विरोधी अभियान चला रही हैं, लेकिन डिंडोरी में 10 कट्टे बीड़ी के बंडलों के लिए 3700 रुपये का भुगतान कर दिया गया.
डिंडौरी के समनापुर जनपद की अंडई ग्राम पंचायत में 15 अगस्त और 26 जनवरी के कार्यक्रमों में 10 कट्टे बीड़ी के बंडलों का भुगतान किया गया, वह भी कुल 3700 रुपये का
12 लड्डुओं के लिए 1040 रुपये का बिल
इतना ही नहीं, कागजों में 120 रुपये का एक लड्डू दिखाया गया, क्योंकि 12 लड्डुओं के लिए 1040 रुपये का बिल बनाया गया. सवाल उठने पर पंचायत सचिव प्रेमसिंह मरकाम ने इसे ग्रामीणों के सम्मान में बीड़ी देने की परंपरा बता दिया. जिला पंचायत के सीईओ अनिल राठौड़ ने कहा कि मामले में कठोर कार्रवाई की जाएगी.
मऊगंज: 40 मिनट में 10 लाख रुपए का खर्च
दूसरा मामला मऊगंज का है, जहां जल संरक्षण के लिए हुई एक बैठक ने भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किए. जल गंगा संवर्धन के 40 मिनट के इस कार्यक्रम में 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च दिखाया गया.
दरअसल, 17 अप्रैल 2025 को जिले के खैरा गांव में जल गंगा संवर्धन अभियान का आयोजन हुआ, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम शामिल हुए.
यह कार्यक्रम केवल 40 मिनट चला, लेकिन जनपद पंचायत मऊगंज ने 10 लाख रुपये खर्च कर दिए. यह राशि एक ही वेंडर, प्रदीप इंटरप्राइजेज को दी गई. किराना, मिठाई, टेंट, लाइट, नाश्ता सब कुछ एक ही दुकान से लिया गया. गद्दे 30 रुपये और चादर 35 रुपये प्रति यूनिट की दर से किराए पर लिए गए, वह भी बल्ब बेचने वाली दुकान से. लाखों के चाय-नाश्ते के बिल कैसे बने? मामला उजागर होने के बाद कलेक्टर संजय कुमार जैन ने जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
शहडोल: 4 लीटर पेंट के लिए लगाए 168 मजदूर
यह दोनों मामले तब सामने आए हैं, जब शहडोल में पुताई के फर्जी बिल और सरकारी कार्यक्रम में अफसरों के 13 किलो ड्राईफ्रूट का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है. शहडोल जिले के ब्यौहारी जनपद के शासकीय हाई स्कूल निपानिया में पुताई के लिए केवल 4 लीटर पेंट इस्तेमाल किया गया, लेकिन कागजों में इसके लिए 168 मजदूर और 65 राजमिस्त्री दिखाए गए. इसके लिए एक लाख 6 हजार 984 रुपये का भुगतान भी कर दिया गया, जिस पर काफी विवाद हुआ था. अब मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि नीचे से ऊपर तक इस सरकार में जमकर लूट और बंदरबांट हो रही है.
पेट अभी भी भरा नहीं: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता मुकेश नायक ने कहा कि प्रहलाद पटेल कितने महंगे मंत्री हैं, यह इससे पता चलता है, क्योंकि आधे घंटे में 10 लाख का खर्च करवा दिया, जबकि डिंडोरी में बीड़ी खरीदी जा रही है, जो दिखाता है कि 25 साल से सत्ता में बैठे लोगों का पेट अभी भी नहीं भरा है.
बहरहाल, सरकारी फाइलों में हर खर्च का हिसाब होता है, लेकिन जब जवाबदेही गायब हो जाए, तो घोटालों को घपलों में बदलने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. पुताई से बीड़ी तक का यह सफर बताता है कि भ्रष्टाचार कैसे रंग बदलता है और हर बार जनता को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ती है. अब देखना यह है कि सरकार सिर्फ जांच करवाएगी या जवाबदेही भी तय करेगी?