भोपाल में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन ने एक महात्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। अयोध्या बायपास, जो वर्तमान में भारी वाहनों और शहर के ट्रैफिक से जूझ रहा है, उसे 10-लेन के चौड़े मार्ग में तब्दील किया जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय प्रशासन ने इसके लिए कमर कस ली है, लेकिन इस विकास की कीमत स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को चुकानी पड़ रही है।
क्यों जरूरी है 10-लेन का बायपास?
वर्तमान में अयोध्या बायपास पर आए दिन लगने वाला जाम और बढ़ते हादसों ने इसे एक खतरनाक स्ट्रेच बना दिया था। प्रस्तावित 10-लेन प्रोजेक्ट में:
6-लेन की मुख्य सड़क होगी (तेज रफ्तार वाहनों के लिए)।
दोनों तरफ 2-2 लेन की सर्विस रोड होंगी (स्थानीय ट्रैफिक के लिए)।
फ्लाईओवर और अंडरपास का जाल बिछाया जाएगा ताकि क्रॉसिंग पर जाम न लगे।
टूटेंगे मकान और दुकानें: नोटिस जारी
विकास की इस राह में सबसे बड़ी बाधा 'अतिक्रमण' और 'अधिग्रहित भूमि' पर बने निर्माण हैं। जिला प्रशासन और NHAI ने सीमांकन का काम पूरा कर लिया है। सड़क के मध्य बिंदु (Center Line) से दोनों ओर निर्धारित दूरी के भीतर आने वाले सैकड़ों मकानों और दुकानों को लाल निशान लगाकर चिन्हित किया गया है।
प्रशासन की ओर से प्रभावितों को बेदखली के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। कई व्यापारियों का कहना है कि वे दशकों से यहाँ व्यापार कर रहे हैं, लेकिन अब अचानक उजाड़े जाने के डर से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन का रुख साफ है—अवैध निर्माण को हर हाल में हटाया जाएगा और नियमानुसार अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आम जनता पर क्या होगा असर?
ट्रैफिक में सुधार: प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भोपाल से विदिशा, सागर और इंदौर की ओर जाने वाला ट्रैफिक बेहद सुगम हो जाएगा।
प्रॉपर्टी के दामों में उछाल: बायपास के आसपास की जमीनों और कॉलोनियों की वैल्यू तेजी से बढ़ेगी।
अस्थायी परेशानी: निर्माण कार्य के दौरान धूल, शोर और डायवर्जन के कारण अगले 2-3 साल तक क्षेत्रवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।