भोपाल को मिली ‘राहत की सांस’: जब सिस्टम हुआ फेल, तो प्रकृति ने संभाली कमान

भोपाल में प्रदूषण से मिली बड़ी राहत। सिस्टम के फेल होने के बाद प्रकृति ने संभाली कमान, AQI में दर्ज की गई 100 अंकों की भारी गिरावट। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
 
 ​MP News Bhopal Air Quality ​भोपाल प्रदूषण समाचार ​AQI 240 to 136 Bhopal
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, जिसे अपनी हरियाली और झीलों के लिए जाना जाता है, पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण की भारी मार झेल रही थी। शहर की हवा इतनी जहरीली हो गई थी कि लोगों का दम घुटने लगा था। प्रशासन की तमाम योजनाएं और 'सिस्टम' जब प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हुआ, तब प्रकृति ने स्वयं मोर्चा संभाला। तेज हवाओं और मौसम के बदले मिजाज ने भोपाल के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को 240 के 'खतरनाक' स्तर से गिराकर 136 के 'मध्यम' स्तर पर ला दिया है।
​सिस्टम की लाचारी और बढ़ता प्रदूषण
​दीपावली के बाद से ही भोपाल की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा था। शहर के कई इलाकों, जैसे हमीदिया रोड, कोलार और गोविंदपुरा में धूल के कण और धुएं ने चादर तान दी थी। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जल छिड़काव (Mist Spraying) और मैकेनिकल स्वीपिंग जैसी मशीनें तो थीं, लेकिन उनका असर जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रहा था।
​बढ़ते निर्माण कार्यों और वाहनों के धुएं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया था। जब शहर का AQI 240 के पार पहुंचा, तो विशेषज्ञों ने इसे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक करार दिया। बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में दिक्कतें होने लगी थीं। प्रशासन की बैठकें तो हुईं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम नहीं दिखा।
​प्रकृति का 'मास्टरस्ट्रोक': कैसे हुआ सुधार?
​जहां इंसानी कोशिशें हार मान चुकी थीं, वहां कुदरत ने अपना खेल दिखाया। पिछले 24 घंटों में हवा की दिशा में बदलाव और हवा की गति बढ़ने से वातावरण में मौजूद प्रदूषक तत्व (PM 2.5 और PM 10) छंटने लगे।
​तेज हवाएं: ऊपरी वायुमंडल में चलने वाली हवाओं ने शहर के ऊपर जमे 'स्मॉग' को उड़ा दिया।
​तापमान में बदलाव: न्यूनतम तापमान में आई गिरावट और नमी के संतुलन ने धूल के कणों को जमीन पर बैठने में मदद की।
​शुद्धिकरण: प्रकृति की इस सक्रियता के कारण ही महज एक दिन के भीतर AQI में लगभग 100 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
​आंकड़ों की जुबानी: सुधार का सफर
पिछला AQI (औसत) वर्तमान AQI सुधार का स्तर
टीटी नगर 242 138 संतोषजनक
कोलार 258 145 मध्यम
गोविंदपुरा 230 130 काफी बेहतर
क्या यह सुधार स्थायी है?
​विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। जब तक शहर में धूल नियंत्रण के सख्त नियम लागू नहीं होते और सार्वजनिक परिवहन में सुधार नहीं होता, तब तक हम पूरी तरह प्रकृति के भरोसे नहीं रह सकते। आने वाले दिनों में अगर हवा की गति फिर से धीमी होती है, तो प्रदूषण का स्तर दोबारा बढ़ सकता है।

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