हाल के घटनाक्रमों में, अमेरिकी प्रशासन ने "पब्लिक चार्ज" (Public Charge) नियम को आधार बनाकर लगभग 75 देशों के वीजा आवेदनों पर कड़े रुख के संकेत दिए हैं। इसमें रूस, ईरान और कई अन्य एशियाई व अफ्रीकी देश शामिल हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका आने वाले विदेशी नागरिक भविष्य में अमेरिकी सरकार के संसाधनों या कल्याणकारी योजनाओं पर आर्थिक रूप से निर्भर न हों।
क्या है 'पब्लिक चार्ज' (Public Charge) नियम?
पब्लिक चार्ज नियम का सीधा अर्थ है—ऐसा व्यक्ति जो अपनी आजीविका के लिए मुख्य रूप से सरकारी सहायता (जैसे नकद सहायता या दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल) पर निर्भर हो सकता है। यदि अमेरिकी दूतावास को लगता है कि कोई आवेदक अमेरिका आने के बाद "पब्लिक चार्ज" बन सकता है, तो उसका वीजा आवेदन खारिज किया जा सकता है।
इन देशों पर गिर सकती है गाज
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सूची में शामिल 75 देशों में वे राष्ट्र शामिल हैं जहाँ से अमेरिका आने वाले प्रवासियों का आर्थिक बैकग्राउंड कमजोर पाया गया है या जहाँ के साथ अमेरिका के कूटनीतिक संबंध तनावपूर्ण हैं। रूस और ईरान जैसे देशों के लिए यह प्रतिबंध सुरक्षा कारणों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के साथ-साथ आर्थिक कारणों से भी जुड़ा है।
वीजा रोक के मुख्य कारण:
आर्थिक सुरक्षा: अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे को बचाने के लिए यह सुनिश्चित करना कि नए प्रवासी खुद का खर्च उठाने में सक्षम हों।
दस्तावेजों की कमी: कई देशों के नागरिक अपनी वित्तीय स्थिति को प्रमाणित करने वाले सही दस्तावेज पेश नहीं कर पा रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा: रूस और ईरान जैसे देशों के मामले में, अमेरिका अपनी आंतरिक सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क है।
वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी आव्रजन नीति (Immigration Policy) में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने दुनिया भर के 75 देशों के नागरिकों को चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) ने एक गोपनीय मेमो के आधार पर रूस, ईरान, अफगानिस्तान और ब्राजील सहित 75 देशों के लिए सभी प्रकार के वीजा की प्रोसेसिंग पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है। इस फैसले के केंद्र में है 'पब्लिक चार्ज' (Public Charge) नियम, जिसे अब और भी कड़ाई से लागू किया जा रहा है।
1. फैसले की मुख्य वजह: 'पब्लिक चार्ज' का डर
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि कई विदेशी नागरिक अमेरिका आने के बाद वहां की सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) पर निर्भर हो जाते हैं। इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर भारी बोझ पड़ता है।
नया नियम: अब काउंसलर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी ऐसे आवेदक को वीजा न दें, जिसके भविष्य में सरकारी सहायता (जैसे कैश बेनिफिट्स, फूड स्टैम्प्स या हाउसिंग सब्सिडी) लेने की थोड़ी भी संभावना हो।
पुनर्मूल्यांकन: विदेश विभाग वर्तमान में अपनी स्क्रीनिंग और वेटिंग (Vetting) प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम लोग ही अमेरिका में प्रवेश करें।
2. प्रभावित होने वाले प्रमुख देश
हालांकि 75 देशों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे Fox News और Kyiv Post) के अनुसार, निम्नलिखित देश इस प्रतिबंध की जद में सबसे ऊपर हैं:
एशिया: रूस, ईरान, अफगानिस्तान, इराक, थाईलैंड।
अफ्रीका: सोमालिया, नाइजीरिया, मिस्र, सूडान, माली, नाइजर।
दक्षिण अमेरिका: ब्राजील, वेनेजुएला।
3. रूस और ईरान के लिए दोहरी मार
रूस और ईरान के लिए यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं है। इन देशों के साथ अमेरिका के कूटनीतिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं।
सुरक्षा चिंताएं: अमेरिका का मानना है कि इन देशों से आने वाले यात्रियों की सही ढंग से सुरक्षा जांच करना चुनौतीपूर्ण है।
प्रतिबंध: यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व के तनाव के कारण इन देशों पर पहले से ही कई प्रतिबंध लागू हैं, अब 'पब्लिक चार्ज' के नाम पर वीजा रोकना उनके नागरिकों के लिए अमेरिका के रास्ते पूरी तरह बंद करने जैसा है।
4. वीजा श्रेणियों पर प्रभाव
इस आदेश का असर केवल पर्यटन (B1/B2) वीजा पर ही नहीं, बल्कि अन्य श्रेणियों पर भी पड़ेगा:
Immigrant Visas: जो लोग ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें सबसे कड़ी वित्तीय जांच से गुजरना होगा।
Student Visas (F, M, J): विदेशी छात्रों को अब यह साबित करना होगा कि उनके पास न केवल पढ़ाई के लिए, बल्कि किसी भी आपात स्थिति के लिए पर्याप्त धन मौजूद है।
Family Visas: अमेरिका में रह रहे नागरिकों के रिश्तेदारों (माता-पिता, भाई-बहन) के लिए अब प्रायोजन (Sponsorship) के नियम और अधिक कठिन हो जाएंगे।
5. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अमेरिका की 'सॉफ्ट पावर' को ठेस पहुँच सकती है।
पर्यटन को नुकसान: 75 देशों से आने वाले पर्यटकों की कमी से अमेरिकी होटल और विमानन उद्योग को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।
प्रतिभा का पलायन: यदि छात्र और पेशेवर अमेरिका नहीं आ पाएंगे, तो वे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप का रुख करेंगे।