रिश्वतखोरी पर बड़ा प्रहार: जबलपुर में सहायक पेंशन अधिकारी ₹10,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
Lokayukta Action Jabalpur: टीम की त्वरित कार्रवाई, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज.
Tue, 11 Nov 2025
Lokayukta Action Jabalpur: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत, जबलपुर में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। सोमवार (10 नवंबर 2025) को संभागीय पेंशन कार्यालय के सहायक पेंशन अधिकारी सचिन झा को ₹10,000 (दस हजार रुपये) की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की गई है और इसने सरकारी महकमों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर शिकंजा कस दिया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता किशोर कुमार झारिया, जो एक रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन हैं, ने लोकायुक्त कार्यालय, जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई थी। किशोर कुमार अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद अपनी पेंशन संबंधी कार्य और नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) बदलने के लिए संभागीय पेंशन कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे।
सहायक पेंशन अधिकारी सचिन झा ने नियमों के तहत किए जाने वाले इस काम को करने के एवज में किशोर कुमार से ₹10,000 की रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत दिए बिना काम न होने से परेशान होकर, आवेदक ने 7 नवंबर को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के समक्ष मामले की शिकायत की।
लोकायुक्त का सफल 'ट्रैप प्लान'
शिकायत मिलने के बाद, लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन किया। जब रिश्वत मांगे जाने के प्रमाण पुख्ता हो गए, तो टीम ने त्वरित कार्रवाई के लिए एक 'ट्रैप प्लान' बनाया।
योजना: सोमवार को तय समय पर फरियादी किशोर कुमार झारिया को रिश्वत की राशि (₹10,000) लेकर पेंशन कार्यालय भेजा गया।
कार्रवाई: जैसे ही किशोर कुमार ने रिश्वत की राशि सहायक पेंशन अधिकारी सचिन झा को दी और झा ने उसे अपने हाथ में लिया, उसी वक्त लोकायुक्त टीम ने मौके पर छापा मारा।
गिरफ्तारी: टीम ने आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद, आरोपी के हाथ धुलवाए गए, जिसमें नोटों पर लगे रासायनिक पदार्थ (Phenolphthalein Powder) के कारण पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का स्पष्ट प्रमाण है।
दर्ज की गई धाराएँ
लोकायुक्त पुलिस ने सहायक पेंशन अधिकारी सचिन झा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 13(1)B और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारी को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई सरकारी कर्मचारियों के बीच एक कड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
