उत्तर भारत का मौसम बेहाल: मध्य प्रदेश में शीतलहर, राजस्थान में जहरीली हवा और बिहार में कोहरे से थमी रफ्तार
मध्य प्रदेश: 7 शहरों में पारा 10°C से नीचे, रिकॉर्ड तोड़ ठंड की शुरुआत
Sun, 23 Nov 2025
मध्य भारत का राज्य मध्य प्रदेश अब कड़ाके की ठंड की चपेट में आ गया है। मौसम विभाग (IMD) से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कम से कम सात प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस (10^\circ C) से नीचे दर्ज किया गया है। यह इस मौसम में पहली बार हुआ है, जो राज्य में भीषण सर्दी के आगमन का संकेत दे रहा है।
ठंड का प्रकोप और प्रमुख शहरों का हाल
ठंड का सबसे अधिक असर हिल स्टेशन पचमढ़ी पर देखा गया, जहाँ तापमान गिरकर 7.2^\circ C या उससे भी नीचे 5.8^\circ C तक पहुंच गया। अन्य शहरों में भी न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है:
राजगढ़: यह सबसे ठंडा शहर रहा, जहाँ पारा 6.5^\circ C से 7.5^\circ C के बीच दर्ज किया गया।
भोपाल और इंदौर: इन दोनों महानगरों में भी न्यूनतम तापमान लगातार 10^\circ C से नीचे बना हुआ है, कई स्थानों पर यह 7.8^\circ C से 9.4^\circ C के आसपास रहा। यह पिछले 10 वर्षों में नवंबर माह का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया।
अन्य शहर: मंडला (8.1^\circ C), छतरपुर का नौगांव (8.5^\circ C), खरगोन (8.8^\circ C), नरसिंहपुर (9.0^\circ C), और खंडवा (9.4^\circ C) में भी तापमान 10^\circ C से नीचे रिकॉर्ड किया गया।
शीतलहर और कोहरे की चेतावनी
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई जिलों में शीतलहर (Cold Wave) का अलर्ट जारी किया है। ठंडी हवाओं के रुख ने ठिठुरन को बढ़ा दिया है। साथ ही, नर्मदापुरम और जबलपुर सहित कई क्षेत्रों में सुबह के समय घना कोहरा (Dense Fog) छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) प्रभावित हुई है। इस कोहरे के कारण सुबह के वक्त वाहनों को हेडलाइट और फॉग लाइट जलाकर चलना पड़ रहा है।
राजस्थान: जहरीली हवा से सांस लेना मुश्किल, 4 शहरों में 300+ AQI
राजस्थान के कई शहर इन दिनों खतरनाक वायु प्रदूषण (Air Pollution) की चपेट में हैं। पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और मौसमी बदलाव के कारण हवा की गुणवत्ता (Air Quality) लगातार बिगड़ती जा रही है, जिससे यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है।
प्रदूषण का 'गंभीर' स्तर
राज्य के कम से कम चार प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से भी अधिक दर्ज किया गया है, जो 'गंभीर' श्रेणी (Severe Category) में आता है। कुछ स्थानों पर तो AQI 344 के 'खतरनाक' (Hazardous) स्तर तक पहुंच गया है।
सबसे प्रदूषित शहर: भिवाड़ी का AQI सबसे अधिक 344 के आसपास दर्ज किया गया है।
अन्य प्रभावित शहर: श्रीगंगानगर (303 AQI), हनुमानगढ़ (369 AQI) और झुंझुनू (359 AQI) में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही है।
अन्य गंभीर श्रेणी के शहर: अलवर, भरतपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, धौलपुर और जयपुर के कुछ हिस्सों में भी AQI 200 से 300 के बीच रहा, जो 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में आता है।
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 300 से अधिक AQI स्तर बच्चों, बुजुर्गों, और अस्थमा तथा श्वसन रोगियों के लिए बेहद खतरनाक है। इस हवा में सांस लेना प्रतिदिन 5.1 सिगरेट पीने के बराबर हानिकारक हो सकता है। डॉक्टरों ने लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और घर के अंदर रहने की सलाह दी है।
बिहार: घना कोहरा बना काल, 10 से अधिक ट्रेनें विलंबित
उत्तर भारत में छाए घने कोहरे (Dense Fog) का सबसे ज्यादा असर रेल यातायात पर पड़ा है, और बिहार इससे बुरी तरह प्रभावित है। घने कोहरे के कारण दृश्यता में भारी कमी आई है, जिससे रेलवे को सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेनों की गति धीमी करनी पड़ी है।
यातायात पर कोहरे का कहर
कोहरे के कारण उत्तर भारत से बिहार आने-जाने वाली 10 से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से कई घंटों की देरी से चल रही हैं। यात्रियों को स्टेशन पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी यात्रा योजनाएं बाधित हुई हैं।
विलंब: लंबी दूरी की प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें 2 घंटे से लेकर 8 घंटे तक की देरी से चल रही हैं।
सुरक्षा उपाय: कम विजिबिलिटी के कारण सिग्नल को ठीक से पहचानना और ट्रैक की स्थिति समझना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
रेलवे ने लिया बड़ा फैसला
यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन संबंधी दिक्कतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने दिसंबर से फरवरी/मार्च तक 24 जोड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करने का फैसला किया है। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के चलने के दिनों में भी कटौती की गई है।
रद्द होने वाली ट्रेनें: इसमें दिल्ली-भागलपुर रूट की प्रमुख ट्रेनें जैसे गरीब रथ एक्सप्रेस और फरक्का एक्सप्रेस भी शामिल हैं।
प्रभावी अवधि: यह फैसला 1 दिसंबर से लागू होगा और 3 महीने तक (फरवरी 2026 या कुछ मामलों में मार्च 2026 तक) प्रभावी रहेगा।
सलाह: रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेनों का टाइम-टेबल (समय सारणी) अवश्य जांच लें।
