एमपी में कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई, दो BLO सस्पेंड
गुना में कलेक्टर का कड़ा एक्शन: निर्वाचन कार्य में घोर लापरवाही पर दो BLO तत्काल प्रभाव से निलंबित, अन्य कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी
Sun, 7 Dec 2025
मध्य प्रदेश के गुना जिले में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री किशोर कुमार कन्याल ने निर्वाचन प्रक्रिया की पवित्रता और सटीकता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्य में घोर लापरवाही, उदासीनता और अनुशासनहीनता बरतने के आरोप में दो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई निर्वाचन जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने के प्रशासन के सख्त रुख को दर्शाती है और अन्य सभी ड्यूटीरत कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है।
कलेक्टर श्री कन्याल ने यह कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, गुना विधानसभा क्षेत्र 29-गुना से प्राप्त विस्तृत प्रतिवेदन के आधार पर की है। रिपोर्ट में दोनों बीएलओ द्वारा अपने-अपने मतदान केन्द्रों पर मतदाता सत्यापन और मैपिंग के महत्वपूर्ण कार्यों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन के आदेश जारी किए गए।
मामला क्रमांक 1: प्रियांश शर्मा की गंभीर चूक
निलंबित होने वाले पहले कर्मचारी प्रियांश शर्मा हैं, जो पीएचई कार्यालय गुना में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे और शा.क.मा. विद्यालय क्रमांक 2, मानस भवन के सामने, गुना (मतदान केन्द्र क्रमांक 88) में बीएलओ के रूप में नियुक्त थे।
प्रतिवेदन के अनुसार, प्रियांश शर्मा के मतदान केंद्र में कुल 467 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 268 मतदाताओं को उन्होंने 'NO Mapping' ऑप्शन के साथ सत्यापित किया था। निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के तहत, मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए प्रत्येक मतदाता को परिवार के मुखिया (Mapped as Progeny) या स्वयं (Mapped as Self) के रूप में सही ढंग से मैप किया जाना अनिवार्य होता है। 'NO Mapping' विकल्प का अत्यधिक उपयोग स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि बीएलओ ने अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर सत्यापन कार्य को गंभीरता से नहीं लिया और सिर्फ खानापूर्ति की। उन्हें इन त्रुटियों को 'Mapped as Progeny' या 'Mapped as Self' में सुधारने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उनके द्वारा इसमें कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके अतिरिक्त, मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया (UEF - ASDR) के तहत भी उन्होंने कुल 133 मतदाताओं को सत्यापित किया, जिसमें सही सत्यापन मानकों का पालन नहीं किया गया।
मामला क्रमांक 2: अरविंद कुशवाह का भौतिक सत्यापन में विफल होना
निलंबित किए गए दूसरे बीएलओ अरविंद कुशवाह हैं, जो शा.मा.वि. घोसीपुरा में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत थे और शा.प्रा.शा. बांसखेडी, गुना कक्ष क्रमांक 1 (मतदान केन्द्र क्रमांक 131) पर बीएलओ की ड्यूटी निभा रहे थे।
इनके मतदान केंद्र में मतदाताओं की कुल संख्या 1027 थी। जांच में पाया गया कि इन्होंने भी 192 मतदाताओं को 'NO Mapping' ऑप्शन से सत्यापित किया था, जो कि एक बड़ी संख्या है और मतदाता सूची की शुद्धता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इन्हें भी तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए थे। इससे भी अधिक गंभीर चूक यह पाई गई कि उन्होंने UEF (ASDR) में कुल 256 मतदाताओं को सत्यापित किया था, लेकिन इस सत्यापन के लिए आवश्यक 'भौतिक सत्यापन' (Physical Verification) उनके द्वारा नहीं किया जा रहा था। भौतिक सत्यापन निर्वाचन प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची में कोई भी अवैध या अपात्र नाम न जुड़ पाए। भौतिक सत्यापन के अभाव में मतदाता सूची के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है।
राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस
कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने साफ कर दिया है कि निर्वाचन कार्य, जो कि लोकतंत्र की बुनियाद है, उसमें इस तरह की लापरवाही, उदासीनता और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कार्य किसी भी अन्य प्रशासनिक कार्य से अधिक महत्वपूर्ण और संवेदनशील है, और इसमें ढिलाई बरतने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निलंबन की अवधि में, दोनों कर्मचारियों का मुख्यालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी, गुना निर्धारित किया गया है। नियमानुसार, निलंबन अवधि में उन्हें जीवन-यापन भत्ता (Subsistence Allowance) प्राप्त होता रहेगा। कलेक्टर की इस त्वरित और कठोर कार्रवाई से जिले के समस्त शासकीय कर्मचारियों को यह स्पष्ट संदेश गया है कि निर्वाचन कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके करियर पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन का यह कदम मतदाता सूची के शुद्धिकरण और आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर उसकी गंभीरता को प्रमाणित करता है।
