DBT स्कीम ने बिगाड़ा बजट, कर्ज के जाल में फंसे MP समेत 12 राज्य!

लाड़ली बहना जैसी योजनाओं से बढ़ा राज्यों पर वित्तीय बोझ, GDP ग्रोथ पर खतरा.
 
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 Ladli Behna Yojana: DBT योजनाओं का बढ़ता प्रभाव: मध्य प्रदेश की 'लाड़ली बहना योजना' जैसी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाएं अब लगभग सभी राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों का अहम हिस्सा बन गई हैं। इन योजनाओं को पिछले विधानसभा चुनावों में महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में गेम चेंजर माना जा रहा है।
​12 राज्यों पर भारी बोझ: PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश (MP), दिल्ली, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित 12 राज्य इन योजनाओं पर करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगे।
​MP पर लगातार बढ़ रहा कर्ज:
​मध्य प्रदेश में 'लाड़ली बहना योजना' के तहत 1.26 करोड़ महिलाओं को मासिक ₹1,500 दिए जाते हैं।
​नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक क्लिक से ₹1,857 करोड़ ट्रांसफर किए।
​योजना का वार्षिक अतिरिक्त बोझ लगभग ₹3,810 करोड़ है, जो राज्य के लगभग ₹4 लाख करोड़ के कुल कर्ज को और बढ़ा रहा है।
​विशेषज्ञों का कहना है कि यह अतिरिक्त खर्च शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से फंड को कम कर सकता है।
​RBI की चिंता: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इन 'फ्रीबीज' योजनाओं पर चिंता जता चुका है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन योजनाओं पर रोक नहीं लगी तो देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर (ग्रोथ) बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
​अन्य राज्यों की योजनाएं: इन 12 राज्यों में कर्नाटक की 'गृह लक्ष्मी' और ओडिशा की 'सुभद्रा योजना' जैसी DBT योजनाएं भी शामिल हैं, जो बजट पर दबाव बढ़ा रही हैं।

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