आम आदमी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने बुलंद की आदिवासियों की आवाज; श्मशान का रास्ता रोकने वाले माफियाओं पर कार्रवाई की मांग
आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने इस गंभीर मुद्दे को जनहित में उठाते हुए जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आदिवासियों को उनका हक नहीं मिला और श्मशान का रास्ता बहाल नहीं हुआ, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम मध्यपुर की शासकीय भूमि पर करीब 100 आदिवासी परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। इन परिवारों के सामने उस वक्त संकट खड़ा हो गया जब गांव के ही कुछ रसूखदार लोगों और कथित खनन माफियाओं ने श्मशान घाट जाने वाले सार्वजनिक रास्ते को जेसीबी से खोदकर पूरी तरह बंद कर दिया।
इस संबंध में ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे पत्र में सुरेंद्र सिंह पटेल, प्रवीण सिंह और रजनीश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बंद होने से अब शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाना असंभव हो गया है।
प्रमोद शर्मा ने साधा प्रशासन पर निशाना
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए 'आप' के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने कहा:
"यह बेहद शर्मनाक है कि आज के दौर में भी आदिवासियों को अपने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए रास्ते की भीख मांगनी पड़ रही है। एक तरफ सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ रीवा में खनन माफिया इतने बेखौफ हैं कि उन्होंने श्मशान की राह ही खोद डाली। प्रशासन को तुरंत इस रास्ते को दुरुस्त करवाना चाहिए और दोषियों पर रासुका जैसी कार्रवाई करनी चाहिए।"
प्रमुख मांगें जिन पर प्रमोद शर्मा ने दिया जोर:
माफिया मुक्त रास्ता: श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते को तुरंत पटवाकर उसे ग्रामीणों के लिए सुलभ बनाया जाए।
आदिवासियों का पट्टा: जो 100 परिवार वर्षों से सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, उन्हें विस्थापित करने के बजाय उन्हें उसी भूमि पर आवास निर्माण का कानूनी अधिकार दिया जाए।
बच्चों के लिए खेल मैदान: गांव के गरीब बच्चों के लिए खेल के मैदान की सुरक्षित व्यवस्था की जाए।
प्रशासनिक सुस्ती पर उठाए सवाल
प्रमोद शर्मा ने कहा कि 13 जनवरी 2026 को आवेदन देने के बावजूद यदि जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं दिखती है, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन माफियाओं के साथ मिला हुआ है। उन्होंने मांग की है कि रीवा कलेक्टर स्वयं इस मामले का संज्ञान लें और मौके पर टीम भेजकर सीमांकन कराएं।
ग्रामीणों में जगी उम्मीद
प्रमोद शर्मा जैसे कद्दावर नेता के इस मुद्दे से जुड़ने के बाद मध्यपुर के आदिवासियों में न्याय की उम्मीद जागी है। स्थानीय निवासी मीना रावत, सुमिरन, और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे लंबे समय से प्रताड़ित महसूस कर रहे थे, लेकिन अब उनकी आवाज को राजनीतिक समर्थन मिलने से वे अपनी लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे।
