21 साल बाद MP में फिर सड़कों पर दौड़ेंगी सरकारी बसें: मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत अप्रैल 2026 से शुरुआत
MP Bus Service News: पहले चरण में इंदौर, भोपाल, उज्जैन सहित 7 संभागों के 25 जिलों पर फोकस; PPP मॉडल पर होगा संचालन
Wed, 19 Nov 2025
Madhya Pradesh govt buses restart: मध्य प्रदेश में लगभग 21 साल के लंबे अंतराल के बाद, राज्य सरकार एक बार फिर सड़कों पर यात्री बस सेवा शुरू करने जा रही है। इसका मकसद राज्य के नागरिकों को, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को, सस्ती, संगठित और सुरक्षित परिवहन सुविधा प्रदान करना है।
'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के तहत नई पहल
तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा वर्ष 2004 में घाटे के कारण राज्य सड़क परिवहन निगम (MPSRTC) को बंद कर दिया गया था। अब, मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर, 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' योजना के तहत इस सेवा को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इसका संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि बसों का परिचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा, लेकिन रूट, किराया और निगरानी सरकार के नियंत्रण वाली नई कंपनी के पास रहेगी।
इन जिलों से होगी शुरुआत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2026 से होने की संभावना है, जिसमें सबसे पहले इंदौर से बसें चलनी शुरू होंगी। पहले चरण में इंदौर और उज्जैन संभागों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके अलावा, सात सहायक क्षेत्रीय कंपनियों के अधीन भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा और सागर सहित लगभग 25 जिलों में इन बसों का संचालन किया जाएगा।
योजना की मुख्य विशेषताएं
विस्तार: सरकार ने राज्य भर में लगभग 6,000 रूटों को मंजूरी दी है, जिन पर कुल 10,000 से अधिक बसों का संचालन किया जाएगा।
मॉडल: यह सेवा PPP मॉडल पर आधारित होगी। सरकार ने इसके लिए एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी 'मप्र यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड' का गठन किया है और सेवा शुरू करने के लिए ₹101.20 करोड़ की इक्विटी पूंजी को मंजूरी दी है।
सुरक्षा और सुविधा: बसों में यात्रियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा और ये आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें AI-आधारित CCTV कैमरे भी लगाए जाएंगे।
ग्रामीण कनेक्टिविटी: इस सेवा का मुख्य लक्ष्य उन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को जोड़ना है जहाँ परिवहन की व्यवस्था ठीक नहीं है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके और लोगों की चिकित्सा एवं शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँच आसान हो सके।
निजी बसों पर नियंत्रण: नई सरकारी बसें सड़कों पर आने से निजी बस ऑपरेटरों के मनमाने किराए और खस्ताहाल बसों पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रूटों के निर्धारण और यातायात दबाव से संबंधित सर्वे का काम पूरा हो चुका है। सरकार का यह कदम राज्य में सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आम नागरिकों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
