मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक पटवारी को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उज्जैन लोकायुक्त की टीम द्वारा की गई है, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को एक बार फिर पुख्ता किया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी पटवारी का नाम नंदलाल चौधरी बताया जा रहा है, जो मंदसौर जिले के सीतामऊ क्षेत्र में पदस्थ था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जमीन के नामांतरण (Mutation) और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार करने के बदले में पटवारी द्वारा मोटी रकम की मांग की जा रही थी।
शिकायतकर्ता काफी समय से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा था, लेकिन बिना रिश्वत के काम आगे नहीं बढ़ रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने उज्जैन लोकायुक्त कार्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
लोकायुक्त का जाल और गिरफ्तारी
शिकायत की पुष्टि होने के बाद, लोकायुक्त एसपी के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। योजना के मुताबिक:
शिकायतकर्ता को केमिकल युक्त नोट देकर पटवारी के पास भेजा गया।
जैसे ही पटवारी ने 30 हजार रुपये की राशि अपने हाथ में ली, सादे कपड़ों में तैनात लोकायुक्त टीम ने उसे दबोच लिया।
पटवारी के हाथ धुलवाए गए, तो वे गुलाबी हो गए, जो इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण है कि उसने रिश्वत के नोटों को छुआ था।
राजस्व विभाग में बढ़ता भ्रष्टाचार: एक गंभीर चिंता
यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी लोकायुक्त के हत्थे चढ़ा हो। जमीन से जुड़े मामलों में पटवारी की भूमिका अहम होती है, और इसी का फायदा उठाकर कई बार आम जनता को प्रताड़ित किया जाता है। इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।