MSP पर मोहन यादव का बड़ा 'त्याग' और किसानों को 'कर्ज' से पैसा देने का नया प्लान

MADHYA PRADESH GOVERNMENT IN DEBT: मध्य प्रदेश सरकार कर्ज लेकर भी सुनिश्चित करेगी न्यूनतम समर्थन मूल्य, धान और गेहूँ की खरीद में केंद्र से कम राशि मिलने पर लिया गया फैसला.
 
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MP ASSEMBLY WINTER SESSION 2025: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण और साहसिक फैसला लिया है। केंद्र सरकार से एमएसपी के तहत धान और गेहूँ की खरीद के लिए कम राशि मिलने के बावजूद, राज्य सरकार ने कर्ज लेकर भी किसानों को पूरा पैसा देने का नया प्लान तैयार किया है। यह फैसला राज्य के किसानों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री का एक बड़ा 'त्याग' माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
​बड़ा त्याग: कर्ज लेकर भी MSP भुगतान का संकल्प
​वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रतिबद्धता: प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार से MSP पर धान और गेहूँ की खरीद के लिए राज्य को अपेक्षित राशि नहीं मिली है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों को देखें तो, केंद्र से मिलने वाली राशि और राज्य सरकार द्वारा किसानों को किए गए वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर आया है। उदाहरण के लिए:
​साल 2024-25 में केंद्र से लगभग ₹16,939.27 करोड़ की राशि मिली, जबकि राज्य सरकार ने किसानों को ₹21,154 करोड़ का भुगतान किया।
​साल 2025-26 में केंद्र से लगभग ₹7,000 करोड़ की राशि मिली, लेकिन राज्य सरकार ने ₹20,205 करोड़ का भुगतान किया।
​किसानों के हित में निर्णय: इस बड़े अंतर के बावजूद, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी उपज का पूरा एमएसपी मिले। इसके लिए, राज्य सरकार अब कर्ज लेकर भी इस अंतर की भरपाई करेगी और धान-गेहूँ का पूरा भुगतान किसानों के खातों में करेगी। यह कदम दर्शाता है कि सरकार किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय जोखिम लेने को तैयार है।
​'भावांतर योजना' और अन्य प्रोत्साहन राशि का सहारा
​MSP सुनिश्चित करने के अलावा, राज्य सरकार भावांतर भुगतान योजना और अन्य प्रोत्साहन राशियों के माध्यम से भी किसानों को लाभ पहुंचा रही है।
​सोयाबीन किसानों को राहत: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना लागू की है। इस योजना के तहत, यदि मंडी में सोयाबीन का दाम सरकार द्वारा तय किए गए मॉडल रेट से कम होता है, तो सरकार उस अंतर की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजती है। हाल ही में, 1.33 लाख से अधिक सोयाबीन किसानों के खातों में भावांतर योजना के तहत ₹233 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं।
​इसके अलावा, सोयाबीन किसानों को एमएसपी के लाभ के अतिरिक्त ₹1,300 प्रति क्विंटल का अलग से प्रोत्साहन देने का भी बड़ा निर्णय लिया गया था, जिसे सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किया गया।
​धान और मोटे अनाज के लिए बोनस:
​धान उत्पादक किसानों को भी राहत राशि दी गई है, जिसमें 3 लाख से अधिक किसानों के खातों में ₹238 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई।
​कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती करने वाले किसानों को ₹1,000 प्रति क्विंटल का बोनस देने की भी घोषणा की गई है, जो किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा अन्य खेती के लिए प्रोत्साहित करेगा।
​किसानों को 'जीरो प्रतिशत ब्याज' पर फसल ऋण
​किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मोहन यादव कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
​ब्याज मुक्त ऋण जारी: राज्य सरकार ने सहकारी बैंकों से किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण (Loan) देने की योजना को जारी रखने का फैसला किया है। इससे किसानों को खेती के लिए आवश्यक पूंजी आसानी से और बिना किसी वित्तीय बोझ के मिल सकेगी।
​प्रोत्साहन अनुदान: समय पर ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से 1.5% सामान्य ब्याज अनुदान और 4% प्रोत्साहन स्वरूप अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा, जिससे किसानों को लगभग 5.5% का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

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