मध्य प्रदेश का खजाना होगा ओवरफ्लो, छतरपुर में मिला एक और खनिज का अकूत भंडार

हीरा उगलने वाली छतरपुर की धरती में अब एक और खनिज का विशाल भंडार मिला. इससे मध्य प्रदेश की किस्मत चमक जाएगी.
 
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छतरपुर जिले के बक्सवाहा के जंगलों में एशिया का सबसे अच्छा हीरा पाया गया. इसके बाद यहां हीरा निकालने के लिए सरकार ने पूरी तैयारियां कर ली हैं. इसी जंगल में अब फॉस्फेट की चट्टानें मिली हैं. इन चट्टानों में बहुतायात में फॉस्फोराइट खनिज है. फिलहाल 57 लाख मीट्रिक टन रॉक फॉस्फेट के भंडार का पता चला है. हीरा के बाद इस खनिज के मिलने के बाद छतरपुर जिला मध्य प्रदेश में नंबर 1 पर पहुंच जाएगा.
खाद बनाने के लिए फॉस्फोराइट का इस्तेमाल
बता दें कि उर्वरक बनाने के लिए फॉस्फोराइट महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता. खासकर, डीएपी खाद बनाने के लिए इसका उपयोग होता है. इस खोज से न केवल छतरपुर जिले का विकास होगा, बल्कि आने वाले दिनों में किसानों को खाद की उपलब्धता और उसकी कीमत में भी राहत मिलने की संभावना है. रॉक फॉस्फेट के भंडार की खोज के बाद सरकार ने खनन की अनुमति दे दी है. जल्द ही इस पर काम शुरू होने की उम्मीद है.
इससे पहले बक्सवाहा में हीरा भी प्रचुर मात्रा में मिला
गौरतलब है कि छतरपुर जिले में खनिज सम्पदा का भंडार है. बक्सवाहा इलाके में हीरा खदानें शुरू होने जा रही हैं. अब रॉक फॉस्फेट का अकूत भंडार मिलने से छतरपुर ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश में रोजगार के नए अवसर बनेंगे. मध्य प्रदेश सरकार का खजाना छतरपुर की खनिज संपदा भर देगी. छतरपुर जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर बड़ामलहरा अनुविभाग के बकस्वाहा तहसील इलाके के सूरजपुरा में फॉस्फोराइट पत्थर की खोज हुई है.
बक्सवाहा के सूरजपुरा में सरकार ने दी खनन की मंजूरी
भू-वैज्ञानिकों ने सर्वेक्षण में जिले के सूरजपुरा व इससे लगे पल्दा, सगौरिया, गरदौनियां में 1070 हेक्टेयर में फॉस्फोराइट का विशाल भंडार पाया है. अब इस भंडार पर हाल ही में केंद्र सरकार ने खनन की मंजूरी दे दी है. इससे यहां उद्योग स्थापित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. केंद्र सरकार के खनन मंत्रालय ने इस क्षेत्र में खनन कार्य के लिए लीज स्वीकृत कर दी है. यह लीज सनफ्लैग आयरन एंड स्टील कंपनी को दी गई है. इस कंपनी को आगामी 3 साल तक खनन करने की अनुमति दी गई है.
महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग में पदस्थ एचओडी डॉ. पीके जैनने बताया "फॉस्फोराइट एक मिनरल होता है, जिसका स्रोत रॉक फॉस्फेट चट्टान होती है. इसी रॉक फॉस्फेट चट्टान में फॉस्फोराइट मिनरल डिपॉजिट होते हैं. छतरपुर जिले के बक्सवाहा के आसपास के गांव में इस खनिज तत्व के खोज की पुष्टि हुई है. बकस्वाहा तहसील के सूरजपुरा और आसपास के गांवों में फॉस्फोराइट खनिज तत्व डिपोजिट हैं. यह एक सेडिमेंट्री रॉक (अवसादी चट्टान) हैं और फॉस्फोराइट इसका प्रमुख स्रोत माना जाता है.
फास्फोराइट का कैसे होता है उपयोग
छतरपुर जिले में मिले फास्फोराइट फॉस्फोरस का प्रमुख स्रोत होता है. इसका उपयोग कृषि क्षेत्र में उर्वरक DAP खाद के रूप में किया जाता है. वहीं पशु आहार, डिटर्जेंट, रसायनों, सिरेमिक, डाई, प्लास्टिक और अन्य औद्योगिक उत्पादों में भी इसका प्रयोग किया जाता है. कृषि प्रधान देश में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. इसका खनन और दोहन आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत फायदेमंद होता है,
निजी कंपनी को 3 साल तक खनन करने की परमिशन
जिला खनिज अधिकारी अमित मिश्राबताते हैं 'सूरजपुरा क्षेत्र में 1070 हेक्टेयर में फास्फोराइट सर्वे में पाया गया है. फॉस्फोराइट पत्थर चट्टन के खनन की अनुमति सनफ्लैग आयरन एंड स्टील को मिली है. कंपनी को पर्यावरण स्वीकृति, वन विभाग की अनापत्ति और राज्य खनिज विभाग की औपचारिक अनुमति प्राप्त करनी होगी. इसके बाद यहां खनन का काम शुरू होगा. स्वीकृत लेने के बाद कंपनी को 3 साल तक खनन करने की अनुमति मिलेगी. परियोजना के लिए कंपनी विस्तृत खनन योजना तैयार करनी होती है, जिसमें खनन के तकनीकी चरण, श्रमिकों की नियुक्ति, पर्यावरण की अनुमित, अपशिष्ट प्रबंधन, परिवहन और सुरक्षा अनिवार्य होती है.
छतरपुर जिले में रोजगार की संभावनाएं बढ़ी
छतरपुर जिले में शुरू होने वाले इस बड़ी खनन परियोजना के शुरू होने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे. इस परियोजना में कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी. इसके अलावा खनन से संबंधित परिवहन, मशीनरी, भंडारण, भोजन, सुरक्षा और अन्य सहायक सेवाओं में भी बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होगा.
बक्सवाहा के जंगलों में 6000 किलो हीरा
बता दें कि छतरपुर जिले के बक्सवाहा के जंगल मध्य प्रदेश की तकदीर और तस्वीर बदलने का दम रखती है. 25 साल पहले बंदर डायमंड प्रोजेक्ट के तहत बक्सवाहा के जंगलों में एक सर्वे शुरू हुआ था, जिसमें जमीन के नीचे 3 करोड़ कैरेट से ज्यादा (लगभग 6000 किलो) हीरे का भंडार होने का दावा किया गया था. उस वक्त इस डायमंड डिपॉजिट की अनुमानित कीमत 55 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो अब लगभग 60 से 70 हजार करोड़ रुपये के करीब है. यहां जल्द ही हीरा खदानें शुरू होने वाली हैं.

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