स्कूलों में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता: राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- 'शिक्षकों के आरोप झूठे और अतिरंजित'
E-Attendance in Schools: नेटवर्क समस्या और डेटा चोरी के आरोपों पर सरकार का बड़ा दावा, ऐप को बताया पूरी तरह 'सुरक्षित'
Thu, 27 Nov 2025
E-Attendance in Schools: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर मचे घमासान के बीच, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट (High Court) में अपना विस्तृत और कड़ा जवाब पेश किया है। सरकार ने 'हमारे शिक्षक ई-अटेंडेंस ऐप' के खिलाफ याचिकाकर्ता शिक्षकों द्वारा लगाए गए नेटवर्क की समस्या और डेटा प्राइवेसी (डेटा चोरी) के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने कोर्ट से स्पष्ट कहा है कि याचिकाकर्ताओं के आरोप झूठे और अतिरंजित (Exaggerated) हैं और इस नीतिगत फैसले में कोर्ट के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
क्या हैं याचिकाकर्ता शिक्षकों के मुख्य आरोप?
राज्य के सरकारी शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ई-अटेंडेंस प्रणाली का विरोध किया था। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित थे:
नेटवर्क की समस्या: खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की भारी कमी है, जिससे शिक्षकों को समय पर अटेंडेंस दर्ज करने में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं।
डेटा प्राइवेसी का खतरा: 'हमारे शिक्षक ई-अटेंडेंस ऐप' शिक्षकों के व्यक्तिगत मोबाइल पर डाउनलोड कराया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि ऐप दिन भर उनकी लोकेशन (GPS) को ट्रैक करता है, जिससे उनके व्यक्तिगत डेटा और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी के लीक होने और साइबर फ्रॉड का बड़ा खतरा है। उन्होंने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 का हवाला देते हुए निजी मोबाइल के उपयोग पर आपत्ति जताई थी।
तकनीकी दिक्कतें: ऐप में लगातार तकनीकी खामियां आना, जिससे कई बार उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है।
हाईकोर्ट में राज्य सरकार का विस्तृत जवाब
राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं के सभी तर्कों को बेबुनियाद बताते हुए अपने जवाब में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
नेटवर्क की पर्याप्त उपलब्धता: सरकार ने दावा किया है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की पर्याप्त उपलब्धता है। उनका तर्क है कि अगर उसी स्कूल में अधिकतर शिक्षक अटेंडेंस लगा पा रहे हैं, तो यह कहना गलत है कि नेटवर्क की समस्या के कारण ई-अटेंडेंस संभव नहीं है।
डेटा सुरक्षा की गारंटी: डेटा प्राइवेसी के मुद्दे पर सरकार ने सबसे बड़ा दावा किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि 'हमारे शिक्षक ई-अटेंडेंस ऐप' के लिए डेटा सिक्योरिटी सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया कि ऐप से शिक्षकों के निजी डेटा के लीक होने या चोरी होने का कोई जोखिम नहीं है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करना: सरकार ने इस व्यवस्था के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट किया। ई-अटेंडेंस प्रणाली का मुख्य लक्ष्य स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति को सुनिश्चित करना, शिक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना और शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है।
नीतिगत फैसला: सरकार ने हाई कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला राज्य सरकार का एक नीतिगत और कार्यकारी फैसला है, जिसमें न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
कोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई
जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ (Single Bench) के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। राज्य सरकार के दावे और विस्तृत जवाब को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया है। कोर्ट ने पूर्व में भी इस तरह की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह एक नीतिगत निर्णय है और न्यायालय के हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।
हालांकि, याचिकाकर्ता शिक्षकों ने पुनर्विचार याचिका दायर कर अपनी दिक्कतों को फिर से कोर्ट के सामने रखा है। अब सरकार के जवाब के बाद, हाई कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख पर अपना अंतिम निर्णय दे सकता है। फिलहाल, सरकारी शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता जारी रहेगी।
