लाड़ली बहना योजना से कटे 500 से ज्यादा नाम, नहीं मिलेंगे रुपए
Ladli Behna Yojana: विभाग की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि महिला हितग्राहियों ने स्वयं लाभ का परित्याग किया है...
Thu, 11 Dec 2025
Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। सीधी जिले में इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाली 500 से अधिक महिलाओं के नाम अचानक लाभार्थी सूची से काट दिए गए हैं। इस चौंकाने वाले घटनाक्रम से प्रभावित महिला हितग्राहियों में भारी निराशा और आक्रोश है। इन महिलाओं को अब योजना के तहत मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता (₹1250) नहीं मिलेगी।
सरकारी पोर्टल पर इन महिलाओं के नाम काटने के जो कारण दर्शाए जा रहे हैं, वे और भी अधिक हैरान करने वाले हैं। कई मामलों में, महिलाओं की जानकारी के बिना ही उनके खाते से 'लाभ परित्याग' (स्वैच्छिक रूप से योजना छोड़ने) का विकल्प चुन लिया गया है। वहीं, कुछ महिलाओं को अपात्र घोषित कर दिया गया है, जिसके खिलाफ वे लगातार शिकायतें दर्ज करा रही हैं।
शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर, विभाग कर रहा बंद
योजना से वंचित होने के बाद, इन महिलाओं ने न्याय के लिए सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) का दरवाजा खटखटाया है। वे लगातार अपनी शिकायतें दर्ज करा रही हैं कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के योजना से बाहर कर दिया गया है। हालांकि, स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब विभाग के अधिकारी इन शिकायतों पर उचित कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें बार-बार 'बंद' कर रहे हैं। इससे महिलाओं की समस्या जस की तस बनी हुई है और उन्हें कोई समाधान नहीं मिल पा रहा है।
एक महिला हितग्राही ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, "मुझे पता ही नहीं चला कि मेरा नाम कब काट दिया गया। जब मैं बैंक गई, तब पता चला कि किस्त नहीं आई है। पोर्टल पर चेक करने पर 'लाभ परित्याग' दिखा रहा है। मैंने न तो कोई ओटीपी दिया, न ही खुद से योजना छोड़ी। यह सरासर नाइंसाफी है।"
'लाभ परित्याग' के पीछे की रहस्यमय प्रक्रिया
मामले में सबसे गंभीर पहलू 'लाभ परित्याग' की प्रक्रिया है। नियमानुसार, कोई भी महिला तभी स्वेच्छा से योजना छोड़ सकती है जब वह आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (One Time Password) को सत्यापित (verify) करे। यह ओटीपी हितग्राही के मोबाइल पर ही आता है।
विभाग के नियमों के बावजूद, बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें आ रही हैं जहाँ महिलाओं ने दावा किया है कि उन्होंने न तो कोई ओटीपी साझा किया और न ही परित्याग फॉर्म भरा, फिर भी उनका नाम कट गया है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि या तो सिस्टम में कोई बड़ी तकनीकी खामी है, या फिर किसी अधिकारी/कर्मचारी या साइबर कैफे संचालक द्वारा अनधिकृत रूप से डेटा का दुरुपयोग किया गया है।
अपात्रता के तर्क और वृद्धावस्था पेंशन का मुद्दा
हालांकि, नाम काटे जाने का एक अन्य प्रमुख कारण अपात्रता भी है। पूर्व में भी, सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रही 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के नाम सूची से हटाए थे। सरकार का तर्क था कि ऐसी महिलाओं को पहले से ही वृद्धावस्था पेंशन के तहत (पहले ₹600, अब ₹1000) मिल रहे हैं, इसलिए उन्हें लाड़ली बहना योजना (₹1250) का लाभ नहीं दिया जा सकता। यह फैसला कई महिलाओं के लिए वित्तीय झटका था।
इसके अलावा, जिन महिलाओं की सरकारी नौकरी है, जिनके परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा से अधिक है, या जिनके पास चार पहिया वाहन हैं, उन्हें भी योजना के तहत अपात्र घोषित किया जाता रहा है। लेकिन ताजा मामलों में, कई पात्र महिलाओं के नाम भी काटे जाने की बात सामने आ रही है, जो सरकार के तर्क पर सवालिया निशान लगाती है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भविष्य की चुनौतियाँ
इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सरकार वित्तीय दबाव के चलते लाड़ली बहना योजना के बजट को कम कर रही है और जानबूझकर पात्र महिलाओं के नाम सूची से हटा रही है। पिछले कुछ महीनों में, कथित तौर पर मध्य प्रदेश में लाखों महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से काटे जाने की खबरें आई हैं।
