मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना वार्षिक बजट पेश कर दिया है। इस बार बजट का मुख्य केंद्र प्रदेश के अन्नदाता यानी किसान रहे हैं। राज्य सरकार ने कृषि और संबंधित क्षेत्रों के लिए कुल 1.15 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के विजन में यह बजट 'आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश' की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
बिजली बिलों में 19,000 करोड़ की बड़ी राहत
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या सिंचाई के दौरान आने वाले भारी बिजली बिल होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने 19,000 करोड़ रुपये का प्रावधान विशेष रूप से कृषि बिजली सब्सिडी के लिए किया है।
उद्देश्य: छोटे और सीमांत किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती या मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना।
प्रभाव: इससे प्रदेश के लाखों किसानों की लागत में कमी आएगी और वे आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग अधिक सहजता से कर पाएंगे।
कृषि क्षेत्र के लिए 1.15 लाख करोड़ का रोडमैप
सरकार ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए केवल सब्सिडी ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दिया है। इस 1.15 लाख करोड़ के फंड को निम्नलिखित मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
सिंचाई परियोजनाएं: नई नहरों का निर्माण और लंबित बांध परियोजनाओं को पूरा करना।
मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना: पात्र किसानों के खातों में सम्मान निधि की अगली किस्तों का समय पर भुगतान।
उद्यानिकी और पशुपालन: केवल पारंपरिक खेती ही नहीं, बल्कि बागवानी और डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान।
मंडी सुधार: मंडियों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण के लिए बजट का एक हिस्सा सुरक्षित रखा गया है।
बजट 2026 की प्रमुख विशेषताएं (High-Level Summary)
सेक्टर बजट प्रावधान (करोड़ में) मुख्य लाभ
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र ₹1,15,000 समग्र विकास और आय वृद्धि
बिजली सब्सिडी (कृषि) ₹19,000 सस्ती बिजली और लागत में कमी
सिंचाई क्षमता विस्तार ₹15,000+ असिंचित भूमि तक पानी पहुँचाना
किसान कल्याण निधि ₹5,000+ किसानों को प्रत्यक्ष नकद सहायता
विशेषज्ञों की राय: क्या बदलेगी किसानों की किस्मत?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि का प्रावधान करना सरकार की नीयत को दर्शाता है, लेकिन असली चुनौती इसका क्रियान्वयन (Implementation) है। यदि बिजली सब्सिडी का लाभ अंतिम छोर के किसान तक पहुंचता है और सिंचाई परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाता है, तो मध्य प्रदेश कृषि विकास दर में एक बार फिर देश में शीर्ष पर रह सकता है।