MP Bus Strike: 2 मार्च से मध्य प्रदेश में बसों का 'चक्का जाम', नई परिवहन नीति के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे हजारों बस मालिक

मध्य प्रदेश में 2 मार्च 2026 से निजी बसों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो रही है। नई परिवहन नीति और सरकारी बसों की वापसी के विरोध में बस संचालकों ने लिया बड़ा फैसला। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।
 
Electric bus

मध्य प्रदेश के करोड़ों यात्रियों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। प्रदेश भर के निजी बस संचालकों ने सरकार की नई परिवहन नीति (New Transport Policy) के विरोध में 2 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। सागर में आयोजित एक प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में 55 जिलों के करीब 8,000 बस ऑपरेटरों ने एकजुट होकर यह बड़ा फैसला लिया है।

​हड़ताल का मुख्य कारण: नई नीति से रोजगार का संकट
​मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा 24 दिसंबर 2025 को जारी की गई नई परिवहन नीति निजी संचालकों के हितों को पूरी तरह नजरअंदाज करती है। ऑपरेटरों का कहना है कि:
​सरकारी बसों की वापसी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अप्रैल 2026 से प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बसें (Roadways) दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। निजी मालिकों को डर है कि इससे उनकी 'मोनोपोली' खत्म हो जाएगी और व्यवसाय घाटे में चला जाएगा।
​मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा: इस योजना के तहत क्लस्टर आधारित मॉडल और पीपीपी मोड पर बसें चलाने का प्रावधान है, जिसे निजी ऑपरेटर अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे हैं।
​टैक्स और आर्थिक बोझ: ऑपरेटरों का दावा है कि नई नीति में टैक्स वृद्धि और परमिट नियमों को कड़ा किया गया है, जिससे छोटे बस मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
​सागर सम्मेलन में बनी रणनीति
​सागर में आयोजित महासम्मेलन में एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय और अन्य पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार को पहले ही अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा जा चुका है। उन्होंने कहा, "हम सरकार को 1 मार्च तक का समय दे रहे हैं। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो 2 मार्च से प्रदेश की सभी 28,500 निजी बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।"
​विरोध के तौर पर बस मालिकों ने आज से ही बसों पर काले झंडे लगाकर अपना आक्रोश जताना शुरू कर दिया है।
​आम जनता और त्योहारों पर असर
​यह हड़ताल ऐसे समय पर होने जा रही है जब मार्च में होली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो:
​दैनिक यात्री और छात्र: शहर से गाँव और एक जिले से दूसरे जिले जाने वाले लाखों यात्री फंस जाएंगे।
​व्यापारिक गतिविधियाँ: सामान की आवाजाही और छोटे व्यापारियों का लॉजिस्टिक्स प्रभावित होगा।
​प्रशासनिक चुनौती: सरकार के लिए इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी।
​सरकार का पक्ष
​वहीं, सरकार का तर्क है कि नई परिवहन नीति और सरकारी बसों की वापसी से यात्रियों को सस्ता और सुरक्षित सफर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य निजी ऑपरेटरों की मनमानी और अनियंत्रित किराए पर लगाम लगाना है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे ऑपरेटरों से संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन जनहित में सुधारों को वापस नहीं लिया जाएगा।
​निष्कर्ष
​मध्य प्रदेश में परिवहन क्षेत्र इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ सरकार सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और सरकारी नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ दशकों से इस क्षेत्र पर काबिज निजी मालिक अपने निवेश और रोजगार को बचाने के लिए सड़कों पर हैं। 2 मार्च का दिन प्रदेश की परिवहन व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित होगा

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