MP Electricity Theft Complaint App: बिजली चोरी पकड़ने वालों को मिलेगा इंजीनियर का वेतन और ₹50,000 तक का इनाम

MP Electricity: ​'वी-मित्र' ऐप पर शिकायत दर्ज करने पर मिलेगा प्रोत्साहन; संबंधित जेई/एई के वेतन से होगी इनाम राशि की कटौती.
 
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जबलपुर: मध्य प्रदेश में बिजली चोरी पर नकेल कसने के लिए राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों ने एक अनूठी और विवादित प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, आम नागरिकों को बिजली चोरी की सटीक सूचना देने पर ₹50 से लेकर ₹50,000 तक का आकर्षक नकद इनाम दिया जाएगा, जिसे एक इंजीनियर के मासिक वेतन के बराबर माना जा रहा है। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (MPPKVVCL) और सेंट्रल डिस्कॉम द्वारा संचालित यह पहल, उपभोक्ताओं को 'विद्युत मित्र' या 'वी-मित्र' बनकर बिजली चोरी की शिकायत दर्ज करने का मौका देती है।
​वी-मित्र ऐप और शिकायत प्रक्रिया
​कंपनी ने इस योजना को लागू करने के लिए 'वी-मित्र' नामक एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। कोई भी व्यक्ति इस ऐप के माध्यम से बिजली चोरी की शिकायत आसानी से दर्ज कर सकता है। शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत दर्ज करते समय नाम, संपर्क नंबर और बैंक खाते की जानकारी देनी होती है। सबसे महत्वपूर्ण, शिकायत को पुष्ट करने के लिए बिजली चोरी के स्थल की फोटो या आवश्यक प्रमाण भी संलग्न करना आवश्यक है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि झूठी या मनगढ़ंत शिकायतों पर कार्रवाई न हो और कंपनी का समय बर्बाद न हो।
​कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। किसी भी तरह की धमकी या दबाव से बचाने के लिए, इनाम की राशि सीधे शिकायतकर्ता के बैंक खाते में भेजी जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया शिकायत सही पाए जाने के सात दिनों के भीतर पूरी करने का नियम बनाया गया है।
​इनाम की राशि और वसूली का विवादित प्रावधान
​योजना का सबसे विवादास्पद और अनोखा पहलू यह है कि शिकायत सही पाए जाने पर जो इनाम राशि शिकायतकर्ता को दी जाएगी, वह विद्युत कंपनी अपनी जेब से नहीं देगी। बल्कि, इस राशि की कटौती उस क्षेत्र में तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के मासिक वेतन से की जाएगी।
​विद्युत कंपनी का तर्क है कि इस प्रावधान का उद्देश्य अधिकारियों पर क्षेत्र में बिजली चोरी रोकने की जिम्मेदारी तय करना है। यदि उनके क्षेत्र में चोरी पकड़ी जाती है, तो इसका मतलब है कि वे अपने कर्तव्यों का सही से निर्वहन नहीं कर रहे थे। इसलिए, प्रोत्साहन राशि देकर जनता को शामिल करने के बावजूद, जिम्मेदारी का बोझ उन्हीं अधिकारियों पर डाला गया है।
​अधिकारियों में असंतोष और पूर्व के विवाद
​इस आदेश को लेकर कंपनी के जूनियर इंजीनियरों और असिस्टेंट इंजीनियरों में भारी असंतोष है। उनका कहना है कि चोरी रोकने के लिए पर्याप्त अमला और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, और फील्ड में काम करने वाले छोटे अधिकारियों के वेतन से कटौती करना अनुचित है। उनका मानना है कि कंपनी को प्रोत्साहन राशि स्वयं वहन करनी चाहिए, न कि फील्ड स्टाफ को दंडित करना चाहिए। पहले भी, कंपनी ऐसे ही विवादित आदेशों के कारण घिर चुकी है। हालांकि, बड़े अधिकारी जैसे डिवीजनल इंजीनियर (DE) या अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी, जो सीधे चोरी वाले क्षेत्रों में तैनात नहीं होते हैं, उन पर कटौती का खतरा कम रहता है।
​योजना के परिणाम और लक्ष्य
​इस योजना का मुख्य लक्ष्य राज्य में बढ़ते लाइन लॉस (बिजली चोरी और तकनीकी खराबी के कारण होने वाला नुकसान) को कम करना है। कंपनी के अनुसार, लॉन्च के बाद से ही इस ऐप पर सैकड़ों शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं, जिनकी जांच विजिलेंस टीम द्वारा की जा रही है। सफल सूचनाकर्ताओं को इनाम की राशि का भुगतान किया जा रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि इस जन-भागीदारी मॉडल से बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा और राज्य का राजस्व बढ़ेगा।
​इस प्रकार, मध्य प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों ने एक साथ दो मोर्चों पर काम करने की योजना बनाई है: नागरिकों को इनाम देकर बिजली चोरी पकड़ने के लिए प्रेरित करना, और अधिकारियों के वेतन से कटौती का प्रावधान रखकर उन्हें अपने काम के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना।

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