मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पिपरई (जिला अशोकनगर) को नई तहसील बनाने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, राजस्व विभाग ने इस संबंध में राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन कर दिया है।
प्रमुख बिंदु और लाभ:
दूरी से मिलेगी राहत: अब तक इस क्षेत्र के ग्रामीणों को तहसील संबंधी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय या अन्य नजदीकी तहसील मुख्यालय जाना पड़ता था।
प्रशासनिक कसावट: नई तहसील बनने से पटवारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के पद स्वीकृत होंगे, जिससे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व मामले तेजी से निपटेंगे।
सरकारी योजनाओं का लाभ: स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अमला होने से केंद्र और राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश की जनता को नए साल का बड़ा तोहफा देते हुए अशोकनगर जिले के पिपरई को पूर्ण तहसील का दर्जा दे दिया है। काफी समय से स्थानीय नागरिकों द्वारा पिपरई को तहसील बनाने की मांग की जा रही थी, जिसे सरकार ने अब अमली जामा पहना दिया है।
राजस्व कार्यों में आएगी तेजी
नई तहसील के गठन के बाद अब मुंगावली तहसील का बोझ कम होगा। पिपरई के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांवों के किसानों को अब अपने खसरे, खतौनी और अन्य जमीनी दस्तावेजों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। शासन द्वारा यहाँ तहसीलदार और सहायक स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी।
विकास को मिलेगी नई गति
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई क्षेत्र तहसील बनता है, तो वहां बुनियादी ढांचे जैसे—सड़क, बिजली और पानी की सुविधाओं में भी सुधार होता है। साथ ही, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल और अन्य विभागों का समन्वय भी बेहतर होता है।