MP Politics: Jitu Patwari writes to CM Mohan Yadav demanding removal of 3 ministers | Budget Session 2026

मध्यप्रदेश बजट सत्र से पहले जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 3 मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग की है। जानिए क्या हैं आरोप और क्या होगा इसका राजनीतिक असर।
 
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मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर सियासी पारा गरमा दिया है। पटवारी ने मांग की है कि राज्यपाल के अभिभाषण से पहले प्रदेश के तीन मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।

​मुख्य विवाद क्या है?

​जीतू पटवारी ने अपने पत्र में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं का हवाला देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि वर्तमान कैबिनेट के कुछ सदस्यों की कार्यप्रणाली न केवल संदिग्ध है, बल्कि वे सीधे तौर पर जनता के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

​पटवारी की मुख्य मांगें:

​दागी मंत्रियों की छुट्टी: पटवारी ने तर्क दिया है कि यदि दागी मंत्री सदन में मौजूद रहेंगे, तो राज्यपाल के अभिभाषण की गरिमा कम होगी।

​जवाबदेही तय करना: उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को कागजों से निकालकर धरातल पर लाया जाए।

​बजट सत्र की शुचिता: कांग्रेस चाहती है कि सत्र शुरू होने से पहले सरकार अपनी छवि साफ करे।

​एमपी बजट सत्र 2026: जीतू पटवारी का 'लेटर बम', क्या मोहन यादव सरकार पर बढ़ेगा दबाव?

​मध्यप्रदेश की सियासत में पारा एक बार फिर चढ़ गया है। विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर सीधे तौर पर चुनौती दे दी है। पटवारी ने मांग की है कि राज्यपाल के अभिभाषण से पहले तीन मंत्रियों को पद से बर्खास्त किया जाए।

​यह मांग न केवल कांग्रेस के आक्रामक रुख को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आगामी बजट सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है।

​1. पत्र का मुख्य आधार: भ्रष्टाचार और नैतिकता के सवाल

​जीतू पटवारी ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सरकार में शामिल तीन मंत्रियों (जिनके नामों का उल्लेख राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है) पर भ्रष्टाचार, अनियमितता और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप हैं। पटवारी का कहना है कि जब तक ये मंत्री पद पर रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

​प्रमुख बिंदु जो पत्र में उठाए गए:

​राज्यपाल की गरिमा: पटवारी के अनुसार, यदि दागी मंत्री सदन में बैठते हैं, तो यह राज्यपाल के पद और उनके अभिभाषण की गरिमा के विरुद्ध है।

​पेपर लीक और शिक्षा घोटाले: सूत्रों के अनुसार, इन मंत्रियों में से कुछ का नाम हालिया प्रशासनिक घोटालों से जोड़ा जा रहा है।

​नैतिक जवाबदेही: कांग्रेस का तर्क है कि 'पवित्रता' की बात करने वाली भाजपा को अपने दागी मंत्रियों पर कार्रवाई कर मिसाल पेश करनी चाहिए।

​2. बजट सत्र 2026 की पूर्व संध्या पर सियासी समीकरण

​मध्यप्रदेश का यह बजट सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण है। एक तरफ सरकार अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और 'लाडली बहना' जैसे कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने 'घेराबंदी' की पूरी तैयारी कर ली है।

​विपक्ष की रणनीति: 'सदन से सड़क तक'

​जीतू पटवारी के इस पत्र को महज एक पत्राचार नहीं, बल्कि एक पॉलिटिकल माइलेज हासिल करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रखती है।

​3. मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग: कानूनी और संवैधानिक पहलू

​संविधान के अनुसार, मंत्रियों की नियुक्ति और बर्खास्तगी मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। हालांकि, राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर मंत्रियों को हटा सकते हैं।

पहलू विवरण

अनुच्छेद 164 मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं।

विपक्ष का तर्क नैतिक आधार पर इस्तीफा या बर्खास्तगी जरूरी।

सरकार का स्टैंड जब तक आरोप सिद्ध न हों, कार्रवाई की आवश्यकता नहीं।

4. भाजपा की प्रतिक्रिया: "विपक्ष का ध्यान भटकाने का प्रयास"

​भाजपा प्रवक्ताओं ने पटवारी के इस पत्र को 'सस्ती लोकप्रियता' हासिल करने का जरिया बताया है। सत्ता पक्ष का कहना है कि कांग्रेस के पास सदन में उठाने के लिए कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह निराधार आरोपों के जरिए सुर्खियां बटोरना चाहती है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार इसे नजरअंदाज कर अपने एजेंडे पर आगे बढ़ेगी।

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