मध्य प्रदेश के करीब 2.50 लाख संविदा कर्मचारियों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संविदा कर्मचारियों को सरकार का 'हनुमान' और 'मजबूत आधार' बताते हुए उनकी पुरानी मांग को स्वीकार कर लिया है। सरकार अब संविदा नीति-2023 को पूरी तरह जमीन पर उतारने की तैयारी में है।
1. 10 साल की सेवा पर नियमितीकरण का फॉर्मूला
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन संविदा कर्मचारियों ने लगातार 10 साल या उससे अधिक समय तक अपनी सेवाएँ दी हैं, उन्हें रिक्त नियमित पदों पर प्राथमिकता दी जाएगी।
50% पदों पर आरक्षण: वर्तमान में सीधी भर्ती के रिक्त पदों में से 50% पद संविदा कर्मियों के लिए आरक्षित रहेंगे।
संविलियन की प्रक्रिया: सरकार एक ऐसी व्यवस्था बनाने जा रही है जिससे अनुभवी संविदा कर्मियों का सीधे नियमित पदों पर संविलियन (Merger) हो सके।
2. DA (महंगाई भत्ता) और CCA नियमों का लाभ
सिर्फ नियमितीकरण ही नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं:
महंगाई भत्ता (DA): अब संविदा कर्मचारियों को भी नियमित शासकीय सेवकों की तरह समय-समय पर बढ़ने वाले महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा। इससे उनके वेतन में सीधा और बड़ा उछाल आएगा।
CCA नियम लागू: अनुशासनात्मक मामलों और सेवा शर्तों के लिए 'सिविल सेवा आचरण नियम' (CCA Rules) के प्रावधानों को संविदा कर्मियों पर भी लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब बिना ठोस कारण या बिना विधिवत जांच के किसी संविदा कर्मी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकेगी, जिससे उनकी जॉब सिक्योरिटी बढ़ेगी।
3. अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं और लाभ
मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में संविदा कर्मियों के लिए निम्नलिखित सुविधाओं के विस्तार का भी आश्वासन दिया:
NPS और ग्रेच्युटी: सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) और ग्रेच्युटी का लाभ समान रूप से लागू किया जाएगा।
स्वास्थ्य बीमा: संविदा कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में लाया जाएगा।
अनुकंपा नियुक्ति: सेवा के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया को और सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
समिति का गठन: संविदा कर्मियों की विसंगतियों को दूर करने के लिए वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी।
4. किसे मिलेगा फायदा?
इस घोषणा का सीधा लाभ उन संविदा कर्मियों को मिलेगा जो महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य राज्य प्रायोजित परियोजनाओं में पिछले एक दशक से अधिक समय से कार्यरत हैं। विशेषकर 2023 की संविदा नीति के तहत आने वाले सभी प्रावधानों को अब सख्ती से लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।