मध्य प्रदेश में कुदरत के दोहरे वार ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले 48 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि (Hailstorm) के बाद अब बर्फीली उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कड़ाके की ठंड (Cold Wave) का अहसास हो रहा है।
तापमान में भारी गिरावट: मंदसौर और पचमढ़ी सबसे ठंडे
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बादलों के छंटते ही उत्तरी हवाओं ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के मंदसौर में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जो इस सीजन के सबसे कम तापमानों में से एक है। वहीं, प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में पारा 5.8 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। ग्वालियर, दतिया और छतरपुर जैसे इलाकों में भी शीतलहर जैसी स्थिति बनी हुई है।
ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान
बीते मंगलवार और बुधवार को ग्वालियर-चंबल अंचल समेत मालवा-निमाड़ के कई जिलों (देवास, शाजापुर, आगर-मालवा और सीहोर) में तेज हवाओं के साथ ओले गिरे। ओलावृष्टि के कारण गेहूं, चना और सरसों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कर किसानों को हुए नुकसान का आकलन किया जाए।
कोहरे की चादर में लिपटा प्रदेश
ठंड के साथ-साथ घने कोहरे (Dense Fog) ने भी मुश्किल बढ़ा दी है। ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड संभाग के जिलों में दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रह गई है। इंदौर और भोपाल में भी सुबह के वक्त हल्का से मध्यम कोहरा देखा जा रहा है, जिससे रेल और सड़क यातायात पर असर पड़ा है। कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं।
आगे कैसा रहेगा मौसम? (Weather Forecast)
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) 31 जनवरी की रात से सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से:
1 और 2 फरवरी को भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिर से हल्की बारिश हो सकती है।
बादल छाने के कारण रात के तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, लेकिन दिन के तापमान में गिरावट बनी रहेगी।
अगले 24 घंटों में ग्वालियर और चंबल संभाग के जिलों में 'सीवियर कोल्ड डे' की स्थिति बनी रह सकती है।