पीएम-कुसुम' योजना से किसानों को बड़ी राहत, सिंचाई अब होगी सस्ती और आसान

PM Kusum Yojana 2025 Update :  सरकार द्वारा शुरू की गई 'प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान' (PM-KUSUM) योजना देश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है.
 
Pm kusum yojana
PM Kusum Yojana 2025 Update : जिसका उद्देश्य खेती को सौर ऊर्जा से जोड़कर उनकी ऊर्जा और जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत, किसानों को अब सोलर पंप लगाने के लिए 60% तक का भारी अनुदान (सब्सिडी) मिल रहा है, जिससे सिंचाई की लागत कम होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। यह योजना न केवल कृषि क्षेत्र को हरित और टिकाऊ बना रही है, बल्कि डीजल पर निर्भरता को कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही है।
​प्रमुख लाभ और वित्तीय सहायता
​पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिससे किसानों पर शुरुआती आर्थिक बोझ बेहद कम हो जाता है।
​60% तक का अनुदान (सब्सिडी): कुल लागत का 60% हिस्सा केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन किया जाता है (आमतौर पर 30% केंद्र और 30% राज्य)।
​30% तक बैंक ऋण: किसान कुल लागत का 30% तक बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।
​10% किसान का अंशदान: इस प्रकार, किसान को सोलर पंप की स्थापना के लिए केवल 10% राशि ही अपनी जेब से लगानी होती है।
​कुछ राज्यों और विशेष श्रेणियों (जैसे SC/ST) के किसानों के लिए राज्य सरकारें अतिरिक्त अनुदान भी प्रदान कर रही हैं, जिससे उनका अंशदान और भी कम हो जाता है। उदाहरण के लिए, राजस्थान में एससी/एसटी किसानों को अतिरिक्त ₹45,000 का अनुदान देने का प्रावधान है। हाल ही में, कुछ राज्यों में सौर ऊर्जा पंप संयंत्रों पर जीएसटी दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है, जिससे किसानों को स्थापना लागत में और अधिक बचत होगी।
​योजना के मुख्य घटक (Three Pillars of PM-KUSUM)
​पीएम-कुसुम योजना को तीन प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है, जिनका लक्ष्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है:
​1. घटक-A: ग्रिड-कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्र (2 मेगावाट तक)
​इस घटक के तहत, किसान अपनी बंजर या कृषि योग्य भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता तक के छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। किसान इस बिजली को डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनी) को बेचकर 25 वर्षों तक एक निश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं। कृषि भूमि पर संयंत्र स्थापित करने की स्थिति में, सौर पैनलों को ऊँचे ढाँचों (Stilt) पर लगाया जाता है ताकि नीचे कृषि कार्य जारी रह सके।
​2. घटक-B: स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंप
​इस घटक में, डीजल से चलने वाले पंपों को बदलने और उन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए, जहाँ ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है, 17.50 लाख स्टैंड-अलोन सौर कृषि पंपों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। यह किसानों को डीजल के महंगे खर्च और बिजली की कटौती से मुक्ति दिलाता है।
​3. घटक-C: ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सौरीकरण
​इस घटक का उद्देश्य ग्रिड से जुड़े मौजूदा 10 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है। किसान अपने पंप की क्षमता के दोगुने तक की सौर पीवी क्षमता स्थापित कर सकते हैं। उत्पन्न बिजली का उपयोग पहले सिंचाई के लिए किया जाएगा, और अतिरिक्त बिजली को वे डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकते हैं।
​आवेदन प्रक्रिया और पात्रता
​पीएम-कुसुम योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना होगा:
​पात्रता: व्यक्तिगत किसान, किसानों का समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें और किसान उत्पादक संगठन (FPO) इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
​आवेदन: किसान नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) या संबंधित राज्य नोडल एजेंसी (SNA) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
​दस्तावेज: आवेदन के दौरान आधार कार्ड, भूमि के कागजात, बैंक खाता विवरण आदि जैसे आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।
​यह योजना न केवल किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है बल्कि देश के कृषि क्षेत्र को एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल दिशा में ले जाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सौर ऊर्जा से सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान अब समय पर और पर्याप्त जल उपलब्धता के साथ खेती कर सकेंगे, जिससे उनकी फसल की पैदावार और आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।