मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत और कई लोगों के बीमार होने के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नगर निगम के अपर आयुक्त (Additional Commissioner) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है, वहीं नगर निगम कमिश्नर को इस लापरवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर के बाणगंगा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से दूषित जल की आपूर्ति की शिकायतें आ रही थीं। स्थिति तब गंभीर हो गई जब एक बाल आश्रम में दूषित पानी और भोजन के संक्रमण के चलते बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। इस घटना में कुछ बच्चों की जान चली गई और दर्जनों अस्पताल में भर्ती हैं। इस हृदयविदारक घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
CM मोहन यादव की बड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को "अक्षम्य लापरवाही" करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
अपर आयुक्त पर गिरी गाज: जल प्रदाय विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे अपर आयुक्त को पद से हटाकर मंत्रालय अटैच कर दिया गया है।
कमिश्नर को नोटिस: इंदौर नगर निगम कमिश्नर से इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है कि आखिर मॉनिटरिंग में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
जांच कमेटी गठित: एक उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया गया है जो पानी के सैंपल्स और सप्लाई लाइन की लीकेज की जांच कर 24 घंटे में रिपोर्ट सौंपेगा।
विपक्ष का हमला और प्रशासन की सफाई
इस कांड के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए इसे 'सरकारी हत्या' करार दिया है। वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में टैंकरों से पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है और पाइपलाइनों की युद्ध स्तर पर मरम्मत की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि कोई और संक्रमण का शिकार न हो।