मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बावजूद सियासी पारा सातवें आसमान पर है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दिल्ली दौरे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात और उसके तुरंत बाद भोपाल में हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक ने राज्य में बड़े बदलावों के संकेत दे दिए हैं। लेकिन इस पूरी पटकथा में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात रही कैबिनेट की अहम बैठक से दो कद्दावर मंत्रियों— कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल— की अनुपस्थिति।
इस अनुपस्थिति ने गलियारों में इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या मोहन यादव सरकार के भीतर सब कुछ ठीक है? या फिर प्रदेश में किसी बड़े 'कैबिनेट रि shuffle' (मंत्रिमंडल फेरबदल) की तैयारी चल रही है?
दिल्ली में शाह के साथ 'सीक्रेट' मंथन
मुख्यमंत्री मोहन यादव का अचानक दिल्ली जाना और अमित शाह के साथ लंबी बैठक करना महज शिष्टाचार भेंट नहीं मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी कैबिनेट विस्तार और फेरबदल था। भाजपा आलाकमान अब मध्य प्रदेश में अपनी नई पीढ़ी की लीडरशिप को पूरी तरह स्थापित करना चाहता है।
अमित शाह से मुलाकात के बाद जब मोहन यादव भोपाल लौटे, तो उम्मीद थी कि सरकार की आगामी योजनाओं पर चर्चा होगी। लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई अनौपचारिक बैठक में विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल जैसे दिग्गजों का न पहुंचना 'नाराजगी' के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल की गैरमौजूदगी के मायने
कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल, दोनों ही भाजपा के कद्दावर नेता हैं और दिल्ली की राजनीति में भी इनका बड़ा कद रहा है। जब इन्हें विधानसभा चुनाव में उतारा गया था, तभी से यह माना जा रहा था कि ये मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। हालांकि, पार्टी ने मोहन यादव को चुनकर सबको चौंका दिया था।
इनकी अनुपस्थिति के पीछे तीन बड़े कारण हो सकते हैं:
विभागों के बंटवारे से असंतोष: चर्चा है कि कुछ बड़े मंत्री अपने वर्तमान विभागों या काम करने की शैली में हो रहे हस्तक्षेप से खुश नहीं हैं।
कैबिनेट विस्तार का डर: सूत्रों के अनुसार, आगामी फेरबदल में कुछ मंत्रियों के पर कतरे जा सकते हैं या उनके विभागों में कटौती हो सकती है।
शक्ति प्रदर्शन: बैठक से दूरी बनाकर ये दिग्गज नेता आलाकमान को अपनी अहमियत का अहसास कराना चाहते हैं।
क्या होने वाला है कैबिनेट में बदलाव?
मध्य प्रदेश कैबिनेट में फिलहाल कई पद खाली हैं। मोहन यादव अपनी टीम में नए चेहरों को शामिल करना चाहते हैं जो 'न्यू एज पॉलिटिक्स' और उनके विजन के साथ फिट बैठ सकें।
परफॉरमेंस रिपोर्ट: अमित शाह ने मंत्रियों की एक परफॉरमेंस रिपोर्ट तैयार करवाई है। जिन मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड कमजोर है, उनकी कुर्सी खतरे में है।
क्षेत्रीय संतुलन: आगामी चुनावों को देखते हुए महाकौशल और ग्वालियर-चंबल संभाग से नए चेहरों को जगह मिल सकती है।
विपक्ष का तंज: 'दो फाड़ में भाजपा'
इस सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है। विपक्षी दल का कहना है कि बीजेपी के भीतर 'शह और मात' का खेल चल रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री की अपनी कैबिनेट पर पकड़ ढीली होती जा रही है और वरिष्ठ नेता उन्हें चुनौती दे रहे हैं।