"साहब ने इशारा किया, मैंने पैसे लिए" – रीवा रिश्वत कांड में फंसे ऑपरेटर और फरियादी ने तहसीलदार को घेरा, EOW की कार्यवाही पर उठाए सवाल

EOW की ट्रैप कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल; फरियादी और आरोपी ने तहसीलदार को बचाने का लगाया आरोप

 
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रीवा के गुढ़ तहसील में EOW का ट्रैप हुआ फेल? फरियादी और आरोपी दोनों ने मिलकर तहसीलदार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप। फरियादी ने कार्यवाही को बताया "फर्जी" और साइन करने से किया इनकार।

रीवा की गुढ़ तहसील में EOW की टीम ने ₹10,000 की रिश्वत लेते ऑपरेटर को पकड़ा, लेकिन असली ड्रामा तो उसके बाद शुरू हुआ।

 क्यों उठ रहे हैं सवाल?

  • फरियादी का दावा: रिश्वत तहसीलदार ने मांगी थी, ऑपरेटर को सिर्फ पैसे पकड़ाने के लिए "इशारा" किया गया।

  • आरोपी ऑपरेटर का बयान: "मैंने सिर्फ साहब के कहने पर लिफाफा लिया, मुझे फंसाया गया।"

  • बड़ा आरोप: फरियादी ने कार्यवाही के कागजों पर साइन करने से मना किया, कहा- "तहसीलदार को बचाया जा रहा है।"

भ्रष्टाचार मिटाने निकली टीम पर ही अब पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। क्या छोटे कर्मचारियों को फंसाकर बड़े अधिकारियों को बचा लिया जाता है?

  • गुढ़ तहसील का मामला: रीवा जिले के गुढ़ तहसील कार्यालय में सोमवार को EOW ने दी थी दबिश।

  • ऑपरेटर गिरफ्तार: ₹10,000 की रिश्वत लेते कंप्यूटर ऑपरेटर भगवान दास चौरसिया को रंगे हाथों पकड़ा गया।

  • तहसीलदार पर आरोप: फरियादी का दावा है कि रिश्वत की मांग तहसीलदार ने की थी, लेकिन ऑपरेटर को बलि का बकरा बनाया गया।

  • हस्ताक्षर से इनकार: कार्यवाही में भेदभाव देख फरियादी ने पंचनामा और अन्य दस्तावेजों पर साइन करने से किया मना।

पूरा मामला: क्या है गुढ़ तहसील का रिश्वत कांड?

रीवा जिले की गुढ़ तहसील में बीते दिनों आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की टीम ने एक बड़ी ट्रैप कार्यवाही को अंजाम दिया। टीम ने तहसील कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर भगवान दास चौरसिया को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। यह रिश्वत एक छात्रा के ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण पत्र के सत्यापन (Verification) के बदले मांगी गई थी।

हैरानी की बात यह है कि इस कार्यवाही के तुरंत बाद खुद फरियादी और आरोपी ऑपरेटर ने EOW की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों का आरोप है कि मुख्य साजिशकर्ता 'तहसीलदार' हैं, जिन्हें टीम ने जानबूझकर क्लीन चिट दे दी है।

फरियादी बृजेंद्र त्रिपाठी का बड़ा बयान: "साहब ने किया था इशारा"

शिकायतकर्ता बृजेंद्र त्रिपाठी ने मीडिया के सामने आकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया:

  1. महीनों से चक्कर: उनकी बेटी की नौकरी बालाघाट में लगी है, जिसके वेरिफिकेशन के लिए तहसीलदार महीनों से चक्कर लगवा रहे थे।

  2. रिकॉर्डिंग में सबूत: त्रिपाठी का दावा है कि उन्होंने EOW द्वारा दिए गए रिकॉर्डर में तहसीलदार के साथ हुई पूरी बातचीत रिकॉर्ड की है, जिसमें पैसों के लेनदेन की बात स्पष्ट है।

  3. सिर्फ इशारे पर दिए पैसे: सोमवार को जब वे पैसे लेकर पहुंचे, तो तहसीलदार ने खुद पैसे न छूकर अपने पास बैठे ऑपरेटर की ओर इशारा किया। तहसीलदार के कहने पर ही उन्होंने ऑपरेटर को लिफाफा दिया।

  4. दबाव में बदली कहानी: फरियादी का आरोप है कि रात 11:30 बजे तक टीम तहसीलदार को आरोपी मान रही थी, लेकिन अचानक "ऊपर से आए फोन" के बाद पूरी कार्यवाही बदल गई और सिर्फ ऑपरेटर को ही आरोपी बनाया गया।

आरोपी ऑपरेटर की सफाई: "मैं तो सिर्फ कर्मचारी हूँ"

गिरफ्तार किए गए कंप्यूटर ऑपरेटर भगवान दास चौरसिया ने भी खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि वे निर्वाचन शाखा में काम करते हैं और ईडब्ल्यूएस का काम उनके अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है। उन्होंने कहा, "साहब (तहसीलदार) ने मुझे इशारा किया कि इनसे लिफाफा ले लो, मैंने बस अपने अधिकारी की बात मानी। मुझे नहीं पता था कि उसमें पैसे हैं।"

EOW की कार्यवाही पर खड़े हुए प्रश्नचिह्न

इस मामले में EOW की कार्यप्रणाली अब चर्चा का विषय बन गई है। फरियादी ने कार्यवाही के कागजों पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी (तहसीलदार) पर कार्यवाही नहीं होगी, वे सहयोग नहीं करेंगे। वहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे फरियादी ने आरोप लगाया कि तहसील परिसर में तहसीलदार उन्हें और उनके साथियों को बर्बाद करने की धमकी भी दे रहे थे।

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

फिलहाल, EOW ने केवल ऑपरेटर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, विभाग का कहना है कि विवेचना (Investigation) अभी जारी है और जांच के बाद अन्य लोगों की संलिप्तता पाए जाने पर उन पर भी कार्यवाही की जाएगी। लेकिन जिस तरह से फरियादी और आरोपी दोनों ने एक सुर में तहसीलदार का नाम लिया है, उससे प्रशासन की साख पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

 

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