SSMC रीवा के स्त्री रोग विभाग में भीषण तनाव: तानाशाही, उत्पीड़न और अराजकता के आरोप, मंत्री शुक्ला से शिकायत

Rewa MP News: चिकित्सा शिक्षा और अस्पताल व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
 
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Rewa MP News: श्यामशाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) रीवा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पिछले कई महीनों से जारी अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सतह पर आ गई है। विभाग के वरिष्ठ और कनिष्ठ चिकित्सकों ने मौजूदा तनावपूर्ण माहौल, अनुशासनहीनता और विभागाध्यक्ष (HOD) की कथित 'तानाशाही भरी कार्यशैली' के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज कराया है।

विभागाध्यक्ष पर तानाशाही और अव्यवस्था फैलाने के गंभीर आरोप

​विरोध कर रहे चिकित्सकों का कहना है कि विभाग में कामकाज पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है। अमर्यादित भाषा, अनुचित दबाव और शत्रुतापूर्ण व्यवहार के चलते चिकित्सकीय सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। आलम यह है कि कई डॉक्टरों ने इस असहनीय तनावपूर्ण माहौल से तंग आकर अपनी नौकरी तक छोड़ दी है, जिसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ा है। चिकित्सकों ने साफ तौर पर कहा कि विभाग की अव्यवस्था और तानाशाही रवैये के कारण काम करना मुश्किल हो गया है और मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।

संकट की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टरों के एक बड़े दल ने स्वास्थ्य विभाग के मंत्री राजेंद्र शुक्ला से मुलाकात कर डॉक्टर बनू कुशवाहा के खिलाफ एक विस्तृत लिखित शिकायत सौंपी।

​डॉ. पूजा गंगवार का पलटवार: 'मानसिक प्रताड़ना के कारण छोड़ी नौकरी'

​वहीं, इस मामले में तनावपूर्ण माहौल के कारण नौकरी छोड़ने वाली डॉक्टर पूजा गंगवार ने एक स्पष्टीकरण जारी कर गंभीर पलटवार किया है। डॉ. गंगवार ने दावा किया कि यह तनाव डॉ. बनू सिंह और डॉ. पद्मा शुक्ला के बीच आपसी द्वेष का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. बनू सिंह ने उन पर डॉ. पद्मा मैडम के खिलाफ झूठी शिकायत लिखकर देने का अत्यधिक दबाव बनाया था, जिसे उन्होंने सरासर मना कर दिया था।

​डॉ. गंगवार ने सीधे आरोप लगाया कि डॉ. बनू सिंह ने उन्हें और डॉ. पद्मा शुक्ला की यूनिट के अन्य सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उनका कहना है कि क्लास वन ऑफिसर की नौकरी इतनी मेहनत के बाद मुश्किल से मिलती है, और यदि कोई इंसान इसे छोड़ रहा है, तो इससे मानसिक उत्पीड़न (Harassment) की गंभीरता समझी जा सकती है।

​छुट्टी और मरीज की मौत पर स्पष्टीकरण

​छुट्टियों के संबंध में लगे आरोपों पर डॉ. गंगवार ने कहा कि उन्होंने चार साल में जितनी छुट्टियां ली हैं, डॉ. बनू सिंह ने उससे दोगुनी छुट्टियां (Child Care Leave सहित) ली हैं । उन्होंने आरोप लगाया कि मरीज अस्पताल में मर रहे हैं, जबकि डॉ. बनू सिंह मेडिकल लीव लेकर शादियों में जा रही हैं और घूम रही हैं।

​एक मरीज की मौत के मामले में, जिस पर वीडियो में सवाल उठाए गए थे, डॉ. गंगवार ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सफल था, लेकिन मरीज को एनेस्थीसिया कॉम्प्लीकेशन के कारण हार्ट अटैक आया, जिससे वह नहीं बच सकी। उन्होंने बताया कि इस पर लिखित स्पष्टीकरण तीन से चार बार दिया जा चुका है, जिसे डॉ. बनू सिंह खुद स्वीकार कर चुकी हैं, फिर भी वह झूठी भ्रामक जानकारी फैला रही हैं।

​निजी प्रैक्टिस और दुर्व्यवहार के आरोप

​डॉ. गंगवार ने डॉ. बनू सिंह की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए, कहा कि जब वह खुद 11 बजे आ रही हैं और 1 बजे निकल जा रही हैं, तो उन्हें राउंड्स की जानकारी कैसे होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मैडम के ऊपर एक बार डिपार्टमेंटल इन्क्वायरी भी बैठ चुकी है, जिसमें उन्हें दोषी पाया गया था और एचओडी की पोस्ट से निकाला गया था।

​इससे भी गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई मरीज किसी निजी अस्पताल के डॉक्टर को दिखाकर सरकारी अस्पताल में आता है, तो डॉ. बनू सिंह उन पर चीखती-चिल्लाती हैं, दुर्व्यवहार करती हैं और कई बार फाइलें फेंक देती हैं। डॉ. गंगवार ने आरोप लगाया कि वह मरीजों के इलाज में बाधा डालती हैं, उन्हें दो-तीन दिन तक पड़े रहने देती हैं ताकि उनकी हालत बिगड़ जाए और रेफर करने वाले डॉक्टर पर नाम आए। उन्होंने डॉ. बनू सिंह से पद की गरिमा बनाए रखने का अनुरोध किया।

​मंत्री ने दिए जांच के आदेश, स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित न होने देने का आश्वासन

​स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने चिकित्सकों को जांच और आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया है। मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और चिकित्सा शिक्षा को किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। चिकित्सक समुदाय ने मंत्री के इस रुख का स्वागत करते हुए जल्द ही एक सुरक्षित और अनुशासित कार्य वातावरण फिर से स्थापित होने की उम्मीद जताई है।

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