टैक्स के बोझ से परेशान 'स्टील किंग' लक्ष्मी मित्तल ने छोड़ा ब्रिटेन
अमीरों पर बढ़ते करों, खासकर 'विरासत कर' की चिंता से दुबई और स्विट्जरलैंड में शिफ्ट होने की तैयारी.
Tue, 25 Nov 2025
भारतीय मूल के दिग्गज उद्योगपति और 'स्टील किंग' के नाम से मशहूर लक्ष्मी निवास मित्तल ने ब्रिटेन को अलविदा कह दिया है। ब्रिटेन के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति मित्तल ने यह बड़ा फैसला लेबर पार्टी की सरकार द्वारा अमीरों पर संभावित रूप से बढ़ाए जाने वाले टैक्स के डर से लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, 75 वर्षीय आर्सेलर मित्तल के कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) ने अपनी टैक्स रेजिडेंसी स्विट्जरलैंड में स्थानांतरित कर ली है और अब वह अपना अधिकांश समय दुबई में बिताने की योजना बना रहे हैं। यह कदम ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह देश से धनवान लोगों के बड़े पैमाने पर पलायन (Exodus) का संकेत देता है।
इनहेरिटेंस टैक्स बना मुख्य कारण
मित्तल के इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह ब्रिटेन की नई टैक्स नीतियां और खास तौर पर इनहेरिटेंस टैक्स (विरासत कर) की चिंता है। सूत्रों के मुताबिक, इनकम टैक्स या कैपिटल गेन टैक्स की तुलना में विरासत कर को लेकर मित्तल परिवार अधिक चिंतित था। ब्रिटेन में विरासत कर की दर 40\% तक है, और सबसे बड़ी बात यह है कि यह दुनिया भर में स्थित व्यक्ति की सभी संपत्तियों पर लागू होता है, जिससे वैश्विक संपत्ति वाले धनी विदेशियों के लिए ब्रिटेन एक महंगा ठिकाना बन जाता है।
लेबर सरकार द्वारा 'सुपर रिच' पर टैक्स बढ़ाने और वर्षों पुरानी 'नॉन-डोमिसाइल' (Non-Dom) टैक्स व्यवस्था को खत्म करने की योजना भी पलायन का कारण बनी है। 'नॉन-डोम' व्यवस्था के तहत, ब्रिटेन में रहने वाले विदेशी नागरिक अपनी विदेशी आय पर कर देने से बच सकते थे, लेकिन इस व्यवस्था के समाप्त होने से मित्तल जैसे कई अरबपतियों पर कर का भारी बोझ पड़ने की आशंका है।
दुबई और स्विट्जरलैंड क्यों?
मित्तल के लिए दुबई और स्विट्जरलैंड आकर्षण का केंद्र बने हैं, क्योंकि इन दोनों ही स्थानों पर विरासत कर शून्य है। यह उनके और उनकी भावी पीढ़ियों के लिए उनकी वैश्विक संपत्ति की सुरक्षा और प्रबंधन के लिहाज से अत्यंत अनुकूल है।
दुबई: रिपोर्टों के अनुसार, मित्तल के पास पहले से ही दुबई में एक शानदार हवेली है, और हाल ही में उन्होंने यूएई के नाइया द्वीप पर एक बड़े भू-खंड में निवेश भी किया है। दुबई की टैक्स-मुक्त नीति, निवेश-हितैषी माहौल और स्थिरता दुनिया भर के अरबपतियों को आकर्षित कर रही है।
स्विट्जरलैंड: मित्तल ने अपनी आधिकारिक टैक्स रेजिडेंसी स्विट्जरलैंड में स्थानांतरित कर दी है, जो अपने अनुकूल कराधान और गोपनीयता के लिए जाना जाता है।
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर असर
मित्तल का देश छोड़ना ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिटिश चांसलर राहेल रीव्स, देश के 20 अरब पाउंड के वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए अमीरों पर कर बढ़ाने की तैयारी में हैं। 2025 की यूके रिच लिस्ट में मित्तल और उनके परिवार को \text{£}15.4 बिलियन की संपत्ति के साथ आठवें स्थान पर रखा गया था। उनका पलायन यह दर्शाता है कि कैसे टैक्स नीतियां वैश्विक धन की गतिशीलता को प्रभावित करती हैं।
यह केवल मित्तल का मामला नहीं है; कई अन्य हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (HNWIs) भी ब्रिटेन की कठोर होती कर व्यवस्था से चिंतित होकर दुबई जैसे कर-अनुकूल गंतव्यों की तलाश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का 'धन पलायन' ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और निवेश के माहौल पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे देश अपनी वित्तीय राजधानी के रूप में अपनी अपील खो सकता है।
