एमपी में अटैचमेंट पर सख्ती: अब नियम विरुद्ध कुर्सी चिपकाने वालों की खैर नहीं मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों में सालों से जमे उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जो अपने मूल पदस्थापना स्थल को छोड़कर दूसरे कार्यालयों में अटैचमेंट पर काम कर रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई कर्मचारी नियम विरुद्ध तरीके से संबद्ध है, तो उसका वेतन तत्काल रोक दिया जाए।
क्या है पूरा मामला?
अक्सर देखा जाता है कि रसूखदार कर्मचारी और अधिकारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपनी पसंद के शहरों या सुविधाजनक विभागों में अटैचमेंट करा लेते हैं। इससे मूल विभाग में कामकाज प्रभावित होता है और जहाँ वे अटैच होते हैं, वहाँ पदों की स्वीकृत संख्या से अधिक लोग जमा हो जाते हैं। सरकार ने अब इस "शॉर्टकट" परंपरा को खत्म करने का निर्णय लिया है।
प्रमुख निर्देश और कार्रवाई
वेतन पर रोक: विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी अपने मूल स्थान पर ज्वाइन नहीं करेंगे, उनका वेतन आहरित नहीं किया जाएगा।
मूल विभाग वापसी: सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन कार्यरत ऐसे सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त (Relieve) करें जो अटैचमेंट पर हैं।
जिम्मेदारी तय: यदि निर्देशों के बाद भी अटैचमेंट बना रहता है, तो संबंधित कार्यालय प्रमुख के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
क्यों पड़ी इस सख्ती की जरूरत?
मैदानी अमले की कमी: स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मैदानी स्तर पर कर्मचारियों की कमी हो रही थी क्योंकि वे मुख्यालयों में अटैच थे।
वित्तीय अनियमितता: वेतन कहीं और से निकल रहा था और काम कहीं और हो रहा था, जिससे बजट और ऑडिट में विसंगतियां आ रही थीं।
पारदर्शिता: नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि जिस पद के लिए भर्ती की गई है, कर्मचारी वहीं अपनी सेवाएं दे।