मध्य प्रदेश, जिसे 'भारत का हृदय' कहा जाता है, अब अपनी भौगोलिक स्थिति का भरपूर लाभ उठाने के लिए तैयार है। हाल ही में राज्य सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच हुए समझौतों के तहत प्रदेश में 36,000 करोड़ रुपये के निवेश से 6 नए एक्सप्रेस-वे और प्रगतिपथ बनाने की योजना को हरी झंडी मिल गई है। यह कदम न केवल परिवहन को सुगम बनाएगा, बल्कि औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के जरिए रोजगार के लाखों अवसर भी पैदा करेगा।
1. विंध्य प्रगतिपथ: विंध्य क्षेत्र की नई जीवनरेखा
इस बड़ी योजना का सबसे अहम हिस्सा 'विंध्य प्रगतिपथ' है। यह एक्सप्रेस-वे रीवा, सीधी, और सिंगरौली जैसे जिलों को सीधे तौर पर जोड़ेगा।
महत्व: विंध्य क्षेत्र अपनी खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। इस पथ के बनने से कोयला और सीमेंट उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।
कनेक्टिविटी: यह उत्तर प्रदेश के साथ व्यापारिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा।
2. नर्मदा प्रगतिपथ: अमरकंटक से अलीराजपुर तक
नर्मदा नदी के समानांतर बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे मध्य प्रदेश का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।
विस्तार: यह प्रदेश के पूर्वी छोर (अमरकंटक) को पश्चिमी छोर (झाबुआ/अलीराजपुर) से जोड़ेगा।
विकास: इसके दोनों ओर 'इंडस्ट्रियल क्लस्टर' विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार मिल सकेगा।
3. अटल प्रगतिपथ (चंबल एक्सप्रेस-वे)
ग्वालियर-चंबल संभाग के विकास के लिए यह प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित होगा।
रूट: यह राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने का काम करेगा।
सुरक्षा और गति: डकैतों की शरणस्थली माने जाने वाले बीहड़ों को अब औद्योगिक हब में बदलने की तैयारी है।
4. मालवा-निमाड़ एक्सप्रेस-वे
इंदौर और उज्जैन जैसे आर्थिक केंद्रों को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेस-वे की रूपरेखा तैयार की गई है। यह क्षेत्र पहले से ही टेक्सटाइल और आईटी का केंद्र है, जिसे इस नई सड़क से और गति मिलेगी।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: क्यों जरूरी है यह निवेश?
1. औद्योगिक क्रांति 2.0: इन एक्सप्रेस-वे के किनारे 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' (SEZ) विकसित किए जाएंगे। जब परिवहन की लागत (Logistics Cost) कम होगी, तो बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आकर्षित होंगी।
2. पर्यटन को बढ़ावा: मध्य प्रदेश में खजुराहो, ओरछा, कान्हा और बांधवगढ़ जैसे वैश्विक पर्यटन स्थल हैं। बेहतर सड़कों का मतलब है पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और स्थानीय होटल व हस्तशिल्प व्यवसाय को मजबूती।
3. रियल एस्टेट में उछाल: जैसे ही एक्सप्रेस-वे का काम शुरू होता है, आसपास की जमीनों की कीमतें बढ़ती हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ता है।
तकनीकी पहलू और चुनौतियां
36,000 करोड़ का बजट केवल सड़कों के लिए नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों (ITS), स्मार्ट लाइटिंग और ई-वे चार्जिंग पॉइंट्स के लिए भी है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी जैसी चुनौतियां सरकार के सामने होंगी, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की जुगलबंदी इन बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।