MP की जनता सीधे चुनेगी नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष, 'राइट टू रिकॉल' भी होगा लागू

​अध्यक्षों के चुनाव में बढ़ेगी जनता की सीधी भागीदारी, अविश्वास पर वापस बुलाने का अधिकार भी मिला.
 
Cm mohan
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट ने मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा। पहले इन पदों के लिए चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली (पार्षदों के माध्यम से) से होते थे, लेकिन अब यह बदलाव नगरीय निकायों में जनता की सीधी भागीदारी को सुनिश्चित करेगा।
​इस संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें निर्वाचित अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास होने पर उन्हें 'राइट टू रिकॉल' (Right to Recall) यानी वापस बुलाने का अधिकार भी लागू किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जनता के पास अब केवल अपने अध्यक्ष को चुनने का ही नहीं, बल्कि उसके काम से असंतुष्ट होने पर उसे पद से हटाने का भी सीधा अधिकार होगा। यह प्रावधान अध्यक्षों को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
​कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस संशोधन विधेयक को अब शीतकालीन सत्र में विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नया प्रावधान मझौली नगर परिषद के उपचुनाव से ही लागू किए जाने की संभावना है।
​मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों के अध्यक्षों के चुनाव की प्रणाली पहले भी बदलती रही है। वर्ष 1999 से 2014 तक महापौर और अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता के वोटों से होता था, लेकिन बीच में कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू कर दी थी। शिवराज सिंह चौहान की पिछली सरकार में भी बदलाव किए गए थे। हालांकि, अब वर्तमान सरकार ने एक बार फिर प्रत्यक्ष प्रणाली को बहाल करने का फैसला किया है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आम जनता की भूमिका मजबूत होगी। यह फैसला आने वाले नगरीय निकाय चुनावों के लिए एक नई राजनीतिक जमीन तैयार करेगा।

Tags