एमपी में एक साथ 75 अफसरों को अनूठी सज़ा, नए फरमान से वायरल हो गईं IAS अफसर संस्कृति जैन

एमपी की राजधानी भोपाल का मामला, 2015 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अफसर ने की नई शुरुआत, पहली बार किसी ने दी ऐसी अनूठी सज़ा.
 
IAS Officer संस्कृति जैन
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम आयुक्त (Municipal Commissioner) संस्कृति जैन के एक सख्त मगर बेहद अनूठे फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी संस्कृति जैन ने एक ही बार में नगर निगम के 75 इंजीनियरों पर बड़ी कार्रवाई की है, जिसके चलते वे अब सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। यह मामला साल 2015 बैच की इस तेज-तर्रार अफसर की कार्यशैली और प्रशासनिक अनुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, क्योंकि पहली बार किसी अधिकारी ने लापरवाही बरतने वाले स्टाफ को ऐसी रचनात्मक और अनूठी सज़ा दी है।
​लापरवाही पर कमिश्नर का सख्त रुख
​नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने हाल ही में भोपाल नगर निगम के कुल 75 असिस्टेंट और सब इंजीनियरों के कार्यों की समीक्षा की थी। कमिश्नर ने इन अधिकारियों से उनके द्वारा किए जा रहे सिविल (निर्माण) कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी थी। यह जानकारी देने के लिए उन्हें पर्याप्त समय भी दिया गया, लेकिन 15 दिनों की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी ये 75 इंजीनियर अपने कार्यों का संतोषजनक ब्यौरा प्रस्तुत नहीं कर सके। बार-बार की चेतावनी और समय देने के बावजूद इन अधिकारियों द्वारा दिखाई गई घोर लापरवाही से आयुक्त बुरी तरह नाराज़ हो गईं। उन्होंने महसूस किया कि जो अधिकारी अपने बुनियादी और महत्वपूर्ण सिविल कार्यों का हिसाब नहीं दे सकते, उन्हें तत्काल एक ज़िम्मेदारी वाला काम सौंपना ज़रूरी है, ताकि उन्हें जवाबदेही का महत्व समझ आ सके।
​75 इंजीनियरों को मिली 'अनूठी सज़ा'
​लापरवाही से खीझकर, कमिश्नर संस्कृति जैन ने एक नया और सख्त फरमान जारी किया। उन्होंने इन सभी 75 असिस्टेंट और सब इंजीनियरों को उनके मूल इंजीनियरिंग कार्यों से हटाकर एक गैर-इंजीनियरिंग प्रशासनिक कार्य में लगा दिया। उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के सहायक (Assistant) के रूप में तैनात किया गया है। इतना ही नहीं, उन्हें विधानसभा चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण कार्य, यानी SIR (Special Integrated Revision) डिजिटाइजेशन का जिम्मा सौंपा गया है।
​यह सज़ा इसलिए भी 'अनूठी' मानी जा रही है क्योंकि इन इंजीनियर्स की तैनाती ऐसे बूथों पर की गई है, जो प्रदर्शन के मामले में सबसे फिसड्‌डी (Top-20 Worst-Performing Booths) माने जाते हैं। कमिश्नर का स्पष्ट संदेश है कि यदि वे अपने कोर इंजीनियरिंग कार्यों को ठीक ढंग से नहीं कर सकते, तो उन्हें सबसे चुनौतीपूर्ण प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाए, जहां त्वरित और त्रुटिहीन परिणाम अपेक्षित होते हैं।
​प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप
​इस फैसले के बाद राजधानी भोपाल के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने भी इस तैनाती की पुष्टि करते हुए कहा है कि इन सहायक और उप यंत्रियों को विधानसभा वार तैनाती दी गई है और वे पूरी मुस्तैदी से SIR के काम में जुट गए हैं। कमिश्नर संस्कृति जैन की यह कार्रवाई सिर्फ सज़ा नहीं है, बल्कि यह निगम के बाकी लापरवाह कर्मचारियों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि काम में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
​IAS संस्कृति जैन की छवि शुरू से ही एक सख्त और मेहनती अधिकारी की रही है। नगर निगम कमिश्नर बनने से पहले वह सिवनी जिले में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी ज्वाइनिंग के तुरंत बाद ही उन्होंने निगम के कामकाज का जायज़ा लेना शुरू कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ा एक्शन देखने को मिला है। यह अनोखी सज़ा 4 दिसंबर तक के लिए दी गई थी।
​इस फैसले की गूंज सिर्फ भोपाल में ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए पूरे प्रदेश में हो रही है। लोग कमिश्नर संस्कृति जैन के इस बोल्ड और रचनात्मक कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह के 'रचनात्मक दंड' से अधिकारियों में काम के प्रति जवाबदेही बढ़ती है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति आती है। यह घटना दर्शाती है कि ब्यूरोक्रेसी में नई पीढ़ी के अधिकारी अब पारंपरिक दंड से अलग हटकर, प्रभावी परिणाम देने वाले तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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