पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार मार्ग को खतरे में डाल दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में अमेरिका द्वारा की गई कथित नाकेबंदी (Blockade) के कारण कम से कम 15 भारतीय व्यापारिक जहाज फंस गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना (Indian Navy) अलर्ट मोड पर है और फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए 'एस्कॉर्ट' ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु: संकट की गहराई
15 जहाजों का संकट: कच्चे तेल और गैस से लदे 15 भारतीय पोत इस रणनीतिक मार्ग में फंसे हुए हैं।
नौसेना की भूमिका: युद्धपोत INS तलवार और INS त्रिकंद को क्षेत्र में तैनात किया गया है।
वैश्विक प्रभाव: दुनिया का 20% तेल इसी संकरे मार्ग से गुजरता है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान और पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका) के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के चलते अमेरिका ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में निगरानी और प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कुछ क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है।
भारतीय जहाज, जो खाड़ी देशों से कच्चा तेल लेकर भारत की ओर आ रहे थे, इस नाकेबंदी के दायरे में आ गए। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है, इसलिए यह संकट सीधा भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर हमला है।
भारतीय नौसेना का 'एस्कॉर्ट' मिशन
भारत सरकार ने बिना समय गंवाए नौसेना को हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए हैं। भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत अपने अत्याधुनिक युद्धपोतों को तैनात किया है।
नौसेना की रणनीति:
सुरक्षित गलियारा (Safe Corridor): नौसेना के युद्धपोत भारतीय झंडे वाले जहाजों के इर्द-गिर्द एक सुरक्षा घेरा बना रहे हैं।
निरंतर संचार: जहाजों के कप्तानों के साथ उपग्रह संचार के जरिए पल-पल की जानकारी ली जा रही है।
हवाई निगरानी: टोही विमान P-8I Poseidon क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहे हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है 'चोक पॉइंट'?
भौगोलिक दृष्टि से, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के बीच स्थित एक जलडमरूमध्य है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
इसकी चौड़ाई सबसे संकरे बिंदु पर मात्र 33 किलोमीटर है।
सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई का अधिकांश तेल निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है।
यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
भारत पर आर्थिक प्रभाव
भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 80% कच्चा तेल आयात करता है। इस नाकेबंदी से सप्लाई चेन बाधित होने पर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, भारतीय मालवाहक जहाजों के फंसने से लॉजिस्टिक लागत में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है।