8th Pay Commission: सीआरपीएफ ने बनाया विशेष बोर्ड, जवानों के वेतन और भत्तों के लिए करेगा पैरवी

सीआरपीएफ ने 8वें वेतन आयोग के लिए एक विशेष बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड आंतरिक सुरक्षा में तैनात जवानों की वीरता और उनके आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए वेतन वृद्धि और भत्तों के लिए सुझाव देगा।
 
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सीआरपीएफ का बड़ा कदम: 8वें वेतन आयोग के सामने जवानों के हकों की पैरवी के लिए विशेष बोर्ड का गठन
​केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपने जवानों और अधिकारियों के आर्थिक हितों को सुरक्षित करने और उनकी वीरता को उचित सम्मान दिलाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। बल ने एक समर्पित 'आर्थिक हित बोर्ड' का गठन किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य आगामी आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के समक्ष बल की विशिष्ट परिस्थितियों और चुनौतियों को मजबूती से रखना है।
​आंतरिक सुरक्षा की रीढ़: सीआरपीएफ की भूमिका
​सीआरपीएफ भारत का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से लेकर कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों और वीआईपी सुरक्षा तक, सीआरपीएफ के जवान हर मोर्चे पर मुस्तैद रहते हैं। बल का तर्क है कि उनकी ड्यूटी की प्रकृति अन्य सेवाओं से भिन्न और अधिक जोखिम भरी है, इसलिए उनके वेतन और भत्तों का निर्धारण करते समय इस 'जोखिम कारक' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
​विशेष बोर्ड के गठन का उद्देश्य
​इस नए बोर्ड का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें तैयार करते समय जमीनी स्तर पर तैनात जवानों की समस्याओं को नजरअंदाज न किया जाए। यह बोर्ड निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा:
​वेतन विसंगतियों को दूर करना: सातवें वेतन आयोग के बाद जो विसंगतियां रह गई थीं, उन्हें दूर करने के लिए ठोस डेटा पेश करना।
​जोखिम भत्ते (Risk Allowance) में वृद्धि: कठिन क्षेत्रों (Hard Areas) में तैनात जवानों के लिए विशेष भत्तों की मांग करना।
​आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं: जवानों के परिवारों के लिए बेहतर कल्याणकारी योजनाओं और चिकित्सा सुविधाओं के लिए बजट की पैरवी।
​पेंशन और ग्रेच्युटी: सेवानिवृत्त होने वाले जवानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए नए सुझाव देना।
​वीरता और बलिदान का उचित मूल्यांकन
​अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सीआरपीएफ का मानना है कि जवानों की वीरता केवल पदकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके वेतन ढांचे में भी इसकी झलक दिखनी चाहिए। बोर्ड इस बात पर जोर देगा कि जो जवान अपनी जान जोखिम में डालकर देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, उन्हें आर्थिक रूप से इतना सशक्त किया जाए कि वे निश्चिंत होकर अपनी ड्यूटी कर सकें।
​आठवें वेतन आयोग से अपेक्षाएं
​सरकारी कर्मचारियों और विशेषकर सशस्त्र बलों को आठवें वेतन आयोग से काफी उम्मीदें हैं। सीआरपीएफ द्वारा गठित यह बोर्ड एक सेतु का काम करेगा, जो बल के महानिदेशालय और वेतन आयोग के बीच संवाद स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संगठित प्रयास से अर्धसैनिक बलों के वेतन ढांचे में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।

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