मणिपुर में कुछ क्षेत्रों को छोड़कर मोबाइल इंटरनेट सेवा पर लगा प्रतिबंध 13 नवंबर तक बढ़ाया गया
Manipur Violence: सरकार ने मणिपुर राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवा पर लगाए गए प्रतिबंध को पांच दिन और बढ़ाकर 13 नवंबर तक कर दिया है। बृहस्पतिवार को अधिकारियों ने यह सूचना दी। अधिकारियों ने बताया कि चार पहाड़ी जिला मुख्यालयों में, जो जातीय हिंसा से प्रभावित नहीं हैं, यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
राज्य सरकार ने कहा कि मोबाइल इंटरनेट पर लगा प्रतिबंध बढ़ाने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि ऐसी आशंका है कि कुछ अपराधी राज्य में लोगों को उकसाने के लिए तस्वीरों, नफरत भरे भाषणों और वीडियो संदेशों को बड़े पैमाने पर प्रसारित कर सकते हैं। इससे राज्य में हिंसा भड़क सकती है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की भी आशंका है।
मणिपुर के गृह विभाग ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया के जरिए आम जनता के बीच प्रचारित/प्रसारित की जा सकने वाली भड़काऊ सामग्री और अफवाहों के परिणामस्वरूप लोगों की जान को खतरा तथा सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचने के अलावा शांति और सांप्रदायिक सद्भाव व्यापक रूप से बिगड़ने का खतरा है। '''
गृह मंत्रालय ने कहा, ‘‘राष्ट्र-विरोधी एवं असामाजिक तत्वों के मंसूबों को विफल करने तथा शांति एवं सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार एवं झूठी अफवाहों के प्रसार को रोककर जनहित में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त उपाय करना आवश्यक हो गया है।" :''
तीन मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से, सितंबर में कुछ दिनों तक मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा हुआ था। राज्य में मेइती समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद जातीय हिंसा भड़क गई, जिसमें अब तक 180 से अधिक लोग मारे गए हैं। इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती लोग मणिपुर की आबादी का लगभग 53% हैं। वहीं, नगा और कुकी आदिवासी समुदायों, जो ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं, की हिस्सेदारी चालीस प्रतिशत है।
