बिहार विधानसभा चुनाव 2025: NDA की ऐतिहासिक जीत, दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी
विकासवाद की आंधी में उड़ा महागठबंधन, पीएम मोदी ने बताया 'MY' फॉर्मूला का कमाल
Fri, 14 Nov 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिए गए, जिसने एक निर्णायक जनादेश के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की वापसी सुनिश्चित कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JD(U)) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने विधानसभा की 243 सीटों में से 200 से अधिक सीटों पर प्रचंड जीत हासिल करते हुए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। यह जीत न केवल NDA के लिए एक ऐतिहासिक विजय है, बल्कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकासवाद' के एजेंडे पर राज्य की जनता के अटूट विश्वास को भी दर्शाती है।
वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही NDA ने बढ़त बना ली थी, जो दिन चढ़ने के साथ सुनामी में बदल गई। इस अभूतपूर्व प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, जिसने लगभग 90 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, सहयोगी दल जेडीयू ने 84 सीटों पर अपना परचम लहराया, जबकि चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी 19 सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया। इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिहार की राजनीति में गठबंधन की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व ही सफलता की कुंजी है।
विपक्षी महागठबंधन को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद सिर्फ 25 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस पार्टी की स्थिति और भी खराब रही, जो महज 6 सीटों पर ही सिमट गई। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव, जिन्होंने अपनी सीट (राघोपुर) से जीत हासिल की, लेकिन उनकी पार्टी और गठबंधन पूरे राज्य में मतदाताओं का विश्वास जीतने में विफल रहे। चुनाव परिणाम आने के बाद विपक्ष ने 'वोट चोरी' और ईवीएम में धांधली जैसे आरोप लगाए, जिसे चुनाव आयोग और एनडीए के नेताओं ने सिरे से नकार दिया।
इस बड़ी जीत के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बिहार की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस जीत को 'सुशासन और विकास' की विजय बताया और विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया। पीएम मोदी ने कहा कि बिहार की जनता ने 'जातिवाद' और 'जंगलराज' की राजनीति को नकार दिया है और NDA के 'MY' (महिला-युवा) फॉर्मूला को अपनाकर विकास को चुना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महागठबंधन की हार के बाद कांग्रेस पार्टी में जल्द ही बड़ा विभाजन देखने को मिल सकता है।
बिहार के इस जनादेश के गहरे राष्ट्रीय निहितार्थ हैं। यह दर्शाता है कि राज्य की महिला मतदाता और युवा वर्ग विकास, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। नीतीश कुमार, जो अब सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए तैयार हैं, के सामने अब इस प्रचंड बहुमत का उपयोग करके राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास की गति को तेज करने की बड़ी चुनौती है। बिहार का यह चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति में जाति-आधारित समीकरणों से हटकर विकास-आधारित राजनीति की बढ़ती स्वीकार्यता का एक स्पष्ट प्रमाण है।
