अमेरिका-ईरान तनाव में चीन की एंट्री, CM-302 मिसाइल से कांपेगी अमेरिकी नौसेना?

ईरान और चीन के बीच CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की डील ने अमेरिका की नींद उड़ा दी है। जानिए कैसे यह 'कैरियर किलर' मिसाइल मिडिल ईस्ट का पूरा समीकरण बदल सकती है।
 
Hormuz Strait Security ​चीन-ईरान मिसाइल डील

मध्य पूर्व (Middle East) की भू-राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। इस तनाव में अब ड्रैगन यानी चीन की सीधी एंट्री हो गई है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ईरान को अपनी सबसे घातक CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें देने की तैयारी कर रहा है।

​यह डील सिर्फ दो देशों के बीच हथियारों की खरीद-बिक्री नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर और फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के प्रभुत्व को सीधी चुनौती है।

​क्या है CM-302 मिसाइल और यह इतनी खतरनाक क्यों है?

​चीन की CM-302 मिसाइल को दुनिया के सबसे बेहतरीन 'कैरियर किलर' हथियारों में गिना जाता है। यह मिसाइल चीन की अपनी YJ-12 मिसाइल का एक्सपोर्ट वर्जन है। इसकी कुछ खूबियां इसे बेहद घातक बनाती हैं:

​सुपरसोनिक रफ्तार: यह मिसाइल मच 3 (ध्वनि की गति से तीन गुना तेज) से अधिक की रफ्तार से चलती है। इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के डिफेंस सिस्टम (जैसे अमेरिका का एजिस सिस्टम) को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है।

​सटीकता और रेंज: इसकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर है। यह समुद्र की सतह से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है, जिससे रडार की नजरों से बचते हुए यह बड़े से बड़े युद्धपोत को तबाह कर सकती है।

​लॉन्च प्लेटफॉर्म: इसे जमीन, जहाज और विमान, तीनों जगहों से लॉन्च किया जा सकता है।

​अमेरिका की चिंता क्यों बढ़ गई है?

​अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ईरान के पास CM-302 जैसी मिसाइलें आती हैं, तो वह इस पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी करने की क्षमता हासिल कर लेगा।

​अमेरिकी विमानवाहक पोतों को खतरा: अमेरिकी नौसेना की ताकत उसके बड़े 'एयरक्राफ्ट कैरियर्स' हैं। CM-302 को विशेष रूप से इन विशाल जहाजों को डुबोने के लिए डिजाइन किया गया है।

​क्षेत्रीय संतुलन: ईरान के पास पहले से ही ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है। चीनी तकनीक मिलने के बाद ईरान की 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

​चीन का बढ़ता प्रभाव: इस डील के जरिए चीन ने साफ कर दिया है कि वह मध्य पूर्व में केवल एक व्यापारिक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक सैन्य शक्ति के रूप में भी खड़ा है।

​इजरायल और अरब देशों पर असर

​ईरान को मिलने वाले इन हथियारों से इजरायल की सुरक्षा पर भी सीधा असर पड़ेगा। इजरायल के बंदरगाह और उसकी नौसेना ईरान की सीधी जद में आ जाएंगे। वहीं सऊदी अरब और यूएई जैसे देश, जो सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं, अब अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने को मजबूर होंगे।

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