डिजिटल बैंकिंग के नियम 1 जनवरी से बदलेंगे, RBI ने जारी की नई गाइडलाइंस

​डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती, ग्राहकों के लिए आसान होंगी सुविधाएं.
 
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India)

​भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1 जनवरी से डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। ये नए दिशानिर्देश मुख्य रूप से ग्राहकों के हितों की रक्षा करने, डिजिटल भुगतान को और अधिक सुरक्षित बनाने और बैंकिंग सेवाओं को सुव्यवस्थित करने पर केंद्रित हैं। ये परिवर्तन इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI, और डेबिट/क्रेडिट कार्ड के उपयोग सहित कई पहलुओं को प्रभावित करेंगे।

​नए नियमों के मुख्य बिंदु:

​स्वचालित आवर्ती भुगतान (Automatic Recurring Payments) के नियम:

​कार्ड, UPI या अन्य प्रीपेड भुगतान साधनों (PPI) का उपयोग करके होने वाले स्वचालित आवर्ती भुगतान (जैसे- सब्सक्रिप्शन, बिल भुगतान) के लिए नए नियम लागू होंगे।

​₹5,000 से अधिक के आवर्ती भुगतान के लिए 'अतिरिक्त कारक प्रमाणीकरण' (AFA) अनिवार्य होगा। इसका मतलब है कि ग्राहक को हर बार भुगतान से पहले एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) या कोई अन्य सुरक्षा जांच पूरी करनी होगी।

​₹5,000 तक के भुगतान के लिए, बैंक को ग्राहक को भुगतान की नियत तारीख से 24 घंटे पहले एक प्री-नोटिफिकेशन भेजना होगा। यह सूचना लेन-देन के बारे में पूरी जानकारी (जैसे- राशि, तारीख) देगी।

​इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों की सहमति के बिना कोई भी बड़ा आवर्ती भुगतान न हो जाए, जिससे उन्हें धोखाधड़ी से बचाया जा सके।

​इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सुरक्षा:

​RBI ने बैंकों को साइबर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का निर्देश दिया है। ग्राहकों को सुरक्षित ब्राउज़िंग, मजबूत पासवर्ड और नवीनतम एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने के बारे में शिक्षित किया जाएगा।

​OTP और लेनदेन अलर्ट भेजने के लिए बैंकों को अधिक विश्वसनीय और तेज प्रणालियों का उपयोग करने की आवश्यकता होगी, जिससे ग्राहकों को तुरंत अपने लेन-देन की जानकारी मिल सके।

​फ्रॉड रिपोर्टिंग और निवारण:

​डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में, बैंकों के लिए एक त्वरित शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य होगा।

​ग्राहकों द्वारा किसी भी अनधिकृत लेन-देन की रिपोर्ट करने पर, बैंक को तत्काल कार्रवाई करनी होगी और नियमों के अनुसार ग्राहक की देयता निर्धारित करनी होगी। ग्राहक द्वारा जल्द रिपोर्टिंग करने पर, नुकसान को सीमित किया जा सकता है।

​KYC अपडेट और खाता परिचालन:

​जिन ग्राहकों का नो योर कस्टमर (KYC) अपडेट लंबित है, उनके लिए नियमों को सरल बनाया गया है। बैंक अब वीडियो-आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (V-CIP) का उपयोग करके भी KYC अपडेट कर सकेंगे, जिससे ग्राहकों को बैंक शाखा जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह खासकर वरिष्ठ नागरिकों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत होगी।

​ये नए नियम 1 जनवरी से प्रभावी होंगे, और ये डिजिटल बैंकिंग परिदृश्य में सुरक्षा, सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बैंकों द्वारा प्रदान किए गए नवीनतम दिशानिर्देशों को ध्यान से पढ़ें और उनका पालन करें।

​ नए नियमों का ग्राहकों पर संभावित असर

​बढ़ी हुई सुरक्षा: ₹5,000 से ऊपर के आवर्ती भुगतानों के लिए AFA अनिवार्य होने से धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी।

​बेहतर नियंत्रण: प्री-नोटिफिकेशन की सुविधा से ग्राहकों को अपने आगामी भुगतानों की जानकारी मिलेगी और वे आसानी से सदस्यता या बिलिंग को मैनेज कर सकेंगे।

​सुविधाजनक KYC: V-CIP की अनुमति से बैंक शाखाओं में जाने की परेशानी कम होगी।

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