EPFO न्यूनतम पेंशन वृद्धि 2025: ₹7,500 की मांग पर PM मोदी सरकार की समीक्षा जारी, करोड़ों पेंशनभोगियों को निर्णायक घोषणा का इंतजार
EPFO minimum pension increase 2025: वर्तमान में ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन से जूझ रहे 60 लाख से अधिक EPS-95 पेंशनर्स को महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत के बीच राहत की आस, वित्तीय घाटे के आकलन के बाद जल्द हो सकता है बड़ा फैसला।
Tue, 18 Nov 2025
EPFO Minimum Pension Increase 2025: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) के पेंशनभोगियों की न्यूनतम मासिक पेंशन में ऐतिहासिक वृद्धि की मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सक्रिय रूप से विचार कर रही है। हालांकि, मौजूदा समय तक पेंशन राशि में कोई आधिकारिक वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन वित्त मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के उच्च स्तरीय बैठकों में इस मांग की समीक्षा की जा रही है। देश भर के 60 लाख से अधिक पेंशनर्स की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार उनकी लंबे समय से चली आ रही ₹7,500 प्रति माह की मांग को स्वीकार करती है।
650% वृद्धि की मांग और पेंशनर्स का संघर्ष
वर्तमान में, EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन केवल ₹1,000 प्रति माह है, जिसे पेंशनर्स, विशेष रूप से EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) द्वारा जीवनयापन के लिए अपर्याप्त बताया गया है। NAC पिछले कई वर्षों से लगातार आंदोलन कर रही है और ₹1,000 की राशि को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग कर रही है, साथ ही महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों व उनके जीवनसाथी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं को भी शामिल करने की मांग की गई है। उनका तर्क है कि 2014 में ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन तय किए जाने के बाद से महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे यह राशि एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है। ₹1,000 से ₹7,500 की यह प्रस्तावित वृद्धि लगभग 650% की होगी।
समीक्षा के केंद्र में संसदीय समिति और वित्त मंत्रालय
इस महत्वपूर्ण मुद्दे को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। हाल ही में, एक संसदीय स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में जीवन यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए न्यूनतम पेंशन राशि की 'ऊपर की ओर संशोधन' (upward revision) पर विचार करने की सिफारिश की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट 2025 से पहले EPS-95 पेंशनर्स के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर "सहानुभूतिपूर्वक विचार" किया जाएगा। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने भी आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि उन्हें विभिन्न हितधारकों, ट्रेड यूनियनों और जनप्रतिनिधियों से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के लिए कई अभ्यावेदन (representations) प्राप्त हुए हैं।
बड़ी वृद्धि के रास्ते में वित्तीय चुनौती
पेंशन में बड़ी वृद्धि के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा इस योजना की वित्तीय स्थिरता है। EPFO के अनुसार, EPS-95 एक "परिभाषित योगदान-परिभाषित लाभ" (Defined Contribution-Defined Benefit) सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस फंड में नियोक्ता 8.33% और केंद्र सरकार 1.16% तक अंशदान करती है। आधिकारिक मूल्यांकन के अनुसार, 31 मार्च 2019 तक पेंशन फंड में एक 'एक्चुरियल घाटा' (actuarial deficit) मौजूद था। हालांकि सरकार इस वित्तीय कमी के बावजूद ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बजटीय सहायता प्रदान कर रही है, लेकिन ₹7,500 की बड़ी वृद्धि के लिए केंद्र सरकार को सालाना हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।
आगे क्या? निर्णायक घोषणा का समय
पेंशनर्स अब बेसब्री से केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की आगामी बैठक और सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। चूंकि यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और करोड़ों बुजुर्गों के कल्याण से जुड़ा है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार जल्द ही कोई निर्णायक घोषणा कर सकती है, जो ₹1,000 और ₹7,500 के बीच की एक संतुलित राशि हो सकती है। पेंशनर्स की उम्मीदें ऊँची हैं कि यह निर्णय भारत के सेवानिवृत्त श्रम बल को वित्तीय गरिमा प्रदान करने में एक नया अध्याय शुरू करेगा।
