भारतीय सर्राफा बाजार के लिए 31 जनवरी का दिन ऐतिहासिक हलचल भरा रहा। जहां एक ओर बजट सत्र की सुगबुगाहट है, वहीं दूसरी ओर कीमती धातुओं की कीमतों में आई भारी गिरावट ने बाजार विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ कमी देखी गई, जो अब ₹2.91 लाख के स्तर पर आ गई है, वहीं सोना भी लुढ़क कर ₹1.50 लाख के करीब पहुंच गया है।
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
कीमतों में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
वैश्विक आर्थिक नीतियां: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में संभावित बदलाव का सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
मांग और आपूर्ति का समीकरण: औद्योगिक मांग में अचानक आई कमी और बड़े निवेशकों द्वारा प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली) ने कीमतों को नीचे धकेला है।
बजट से पहले की अनिश्चितता: भारत में केंद्रीय बजट से पहले अक्सर निवेशक सतर्क हो जाते हैं, जिसका असर बाजार की लिक्विडिटी पर पड़ता है।
ग्राहकों और निवेशकों पर प्रभाव
यह गिरावट उन परिवारों के लिए राहत की खबर है जिनके घरों में शादियों का सीजन आने वाला है। दूसरी ओर, जो लोग लंबे समय से निवेश के लिए सही समय का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह एक 'Buy on Dip' (गिरावट पर खरीदारी) का बेहतरीन अवसर हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है, जिससे कीमतें दोबारा ऊपर जा सकती हैं।
सोना-चांदी मूल्य तुलना तालिका (पिछले 6 महीने)
इस तालिका के माध्यम से आप देख सकते हैं कि कीमतों में किस तरह का उतार-चढ़ाव आया है और 31 जनवरी की गिरावट कितनी असाधारण है:
महीना सोने का औसत भाव (प्रति 100g/24K)* चांदी का औसत भाव (प्रति kg)* बाजार का रुझान
अगस्त 2025 ₹1,65,000 ₹3,20,000 स्थिर
सितंबर 2025 ₹1,68,500 ₹3,35,000 मामूली बढ़त
अक्टूबर 2025 ₹1,72,000 ₹3,50,000 त्यौहारी मांग
नवंबर 2025 ₹1,70,000 ₹3,42,000 मुनाफावसूली
दिसंबर 2025 ₹1,62,000 ₹3,25,000 सुस्ती
जनवरी (शुरुआत) ₹1,58,000 ₹3,10,000 गिरावट जारी
31 जनवरी 2026 ₹1,50,000 ₹2,91,000 भारी गिरावट
ऊपर दिए गए आंकड़े बाजार के औसत रुझानों पर आधारित हैं। स्थानीय करों (GST) और मेकिंग चार्जेस के कारण आपके शहर के भाव में मामूली अंतर हो सकता है।
इस डेटा का विश्लेषण (Key Insights)
चांदी में बड़ी सेंध: अगस्त की तुलना में चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग ₹50,000 से अधिक टूट चुकी है। ₹3 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे जाना बड़े तकनीकी सुधार की ओर इशारा करता है।
सोने का सपोर्ट लेवल: सोना ₹1.50 लाख के महत्वपूर्ण 'सपोर्ट लेवल' पर आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिक्री) दिख सकती है।
खरीदारों के लिए लाभ: अगस्त-अक्टूबर के बीच खरीदारी करने वालों की तुलना में, वर्तमान में खरीदारों को प्रति किलो चांदी पर सीधे तौर पर भारी बचत हो रही है।