Gupt Navratri Puja Vidhi | Gupt Navratri 2024 के पावन अवसर पर पढ़ें Maa Durga Chalisa, जानें पढने के फायदे
दुर्गा चालीसा पढने के फायदे | durga chalisa padhne ke fayde | durga chalisa pdf | gupt navratri puja vidhi- Gupt navratri puja vidhi in hindi: गुप्त नवरात्री की शुरुआत आज यानि की 6 जुलाई से से शुरू हो गयी है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको गुप्त नवरात्री से जुडी महत्वपूर्ण बातों बताने जा रहें है।
Gupt navratri puja vidhi in hindi: गुप्त नवरात्री की शुरुआत आज यानि की 6 जुलाई से से शुरू हो गयी है। आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको गुप्त नवरात्री से जुडी महत्वपूर्ण बातों बताने जा रहें है। गुप्त नवरात्री की पूजा विधि आसान भाषा में समझे एवं इस दौरान दुर्गा चालीसा पढ़ने के फायदों के बारे में भी जाने।
Gupt navratri puja vidhi in hindi:
- नवरात्रि के पहले घर और पूजा घर की साफ सफाई कर लें।
- पूजा शुरू होने के पहले पूजा स्थल पर मिट्टी के बर्तन में जौ लगा देना चाहिए।
- पूजा के दिन कलश की स्थापना करें और अखंड ज्योति जलाएं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- नवरात्रि के पहले दिन मां के महाविद्या मां काली स्वरूप की आराधना करनी चाहिए।
दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) पाठ के लाभ / durga chalisa padhne ke fayde
शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा (Maa Durga) की जो भी पूजा करता है और दुर्गा चालीसा का पाठ करता है वह माता की कृपा पाता है और कई लाभ प्राप्त करता है।
- दुर्गा चालीसा के पाठ से निम्नलिखित लाभ होते हैं।
- दुर्गा चालीसा पाठ को करने से व्यक्ति के कॉन्फिडेंस में वृद्धि होती है।
- दुर्गा चालीसा पाठ मानसिक तनाव को दूर करने में भी सहायक है।
- ऐसा माना जाता है की दुर्गा चालीसा के पाठ से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- दुर्गा चालीसा पाठ को करने से आर्थिक समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
- यह पाठ मन की चंचलता को भी दूर करता है।
Namo Namo Durge Sukh Karni, दुर्गा चालीसा पाठ, Durga Chalisa Lyrics
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
