होर्मुज से बढ़ी जहाजों की आवाजाही, तेल कीमतों में बड़ी गिरावट; भारत समेत दुनिया को राहत

Strait of Hormuz से 24 घंटे में 26 जहाज गुजरने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। जानिए भारत और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा।
 
होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz news crude oil price fall Brent crude today WTI crude price Iran US tension oil market update global oil supply
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz से पिछले 24 घंटों में 26 जहाजों के गुजरने की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह संकेत गया है कि क्षेत्र में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो सकते हैं और तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट का खतरा कुछ कम हुआ है। 
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। खाड़ी देशों—Saudi Arabia, Iraq, United Arab Emirates, Kuwait और Qatar—का अधिकांश तेल निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर है।
पिछले कुछ महीनों से Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर संकट गहराया हुआ था। जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने से तेल कीमतों में उछाल देखा गया था। 
26 जहाज निकलने से बाजार में भरोसा लौटा
बुधवार को आई रिपोर्ट के अनुसार 24 घंटे में 26 जहाजों ने होर्मुज पार किया। यह संख्या पिछले कई हफ्तों के मुकाबले बेहतर मानी जा रही है। इससे निवेशकों और तेल कारोबारियों को संकेत मिला कि सप्लाई चेन दोबारा पटरी पर लौट सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों तक यह ट्रेंड जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में और नरमी देखी जा सकती है।
कितनी गिरी तेल की कीमत?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड लगभग 5.6% गिरकर 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 5.7% गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। यह पिछले दो हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। 
हालांकि गुरुवार को हल्की रिकवरी भी देखी गई, क्योंकि निवेशकों को अभी भी क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म होने का भरोसा नहीं है। 
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
India दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत की खबर है।
इसका सीधा असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा
महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिलेगी
सरकार का आयात बिल घटेगा
रुपये पर दबाव कम होगा
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कीमतें 100 डॉलर से नीचे बनी रहती हैं तो भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा।
क्या खत्म हो गया संकट?
विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं है।
मुख्य जोखिम:
ईरान-अमेरिका वार्ता अभी निर्णायक नहीं
समुद्री सुरक्षा अभी भी संवेदनशील
बीमा लागत ऊंची बनी हुई
किसी भी सैन्य घटना से कीमतें फिर उछल सकती हैं
यानी बाजार फिलहाल “सावधानी के साथ राहत” की स्थिति में है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
अगर होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो:
वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत होगी
शिपिंग लागत घटेगी
एयरलाइन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को राहत मिलेगी
ऊर्जा आधारित महंगाई कम होगी
अमेरिकी शेयर बाजार में एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में तेजी इसी उम्मीद का संकेत मानी जा रही है। 
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य से 24 घंटे में 26 जहाजों का निकलना सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए राहत का बड़ा संकेत है। हालांकि जोखिम अभी बाकी हैं, लेकिन फिलहाल तेल बाजार ने राहत की सांस ली है.

Tags