India-China Export News: वैश्विक आर्थिक सुस्ती और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत ने निर्यात के मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दिसंबर महीने में चीन को भारत के निर्यात (Export to China) में करीब 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल न केवल भारत की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भारतीय उत्पादों की मांग दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब भारत-चीन के राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, इसके बावजूद व्यापारिक स्तर पर भारत ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
दिसंबर में क्यों बढ़ा चीन को भारत का निर्यात?
दिसंबर 2025 में चीन को भारत के निर्यात में आई 67% की छलांग के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं:
औद्योगिक कच्चे माल की बढ़ी मांग
चीन में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के दोबारा रफ्तार पकड़ने से कच्चे माल और इंटरमीडिएट गुड्स की मांग बढ़ी।
ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव
कई देशों ने चीन के बजाय भारत को वैकल्पिक सप्लायर के रूप में अपनाया, जिससे भारत की निर्यात क्षमता मजबूत हुई।
सरकारी नीतियों का असर
PLI स्कीम और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं ने भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया।
चीन को भारत ने कौन-कौन से उत्पाद भेजे?
चीन को निर्यात में बढ़ोतरी मुख्य रूप से इन सेक्टरों की वजह से हुई:
खनिज ईंधन और पेट्रोलियम उत्पाद
लौह अयस्क (Iron Ore)
केमिकल्स और ऑर्गेनिक कंपाउंड
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स
फार्मास्यूटिकल रॉ मटीरियल (API)
विशेषज्ञ बताते हैं कि लौह अयस्क और केमिकल्स की मांग में खास तौर पर उछाल देखा गया, जिसने कुल निर्यात आंकड़ों को ऊपर पहुंचाया।
भारत-चीन व्यापार संतुलन पर क्या असर?
हालांकि भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा लंबे समय से चिंता का विषय रहा है, लेकिन निर्यात में इस तेज बढ़ोतरी से ट्रेड डेफिसिट को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड अगले कुछ महीनों तक बना रहता है, तो भारत-चीन व्यापार संबंधों में संतुलन बेहतर हो सकता है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार:
भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है।
चीन जैसे बड़े बाजार में निर्यात बढ़ना भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम है।
अगर वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाया गया, तो आने वाले समय में निर्यात और तेज हो सकता है।
क्या आगे भी जारी रहेगी यह तेजी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत-चीन व्यापार में उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन:
अगर वैश्विक मांग स्थिर रही
और भारत सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीतियां जारी रहीं
तो 2026 में भी भारत का निर्यात मजबूत बना रह सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
भारत की वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति
घरेलू उद्योगों को बढ़ावा
रोजगार के नए अवसर
विदेशी मुद्रा आय में इजाफा
यह उपलब्धि भारत के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” विजन को भी मजबूती देती है।