पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की ईंधन सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सबसे बड़ा असर पड़ोसी देश बांग्लादेश पर देखने को मिल रहा है, जहाँ पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं। ईंधन की किल्लत और आपूर्ति में देरी के चलते आम लोगों में घबराहट (Panic) का माहौल है। वहीं, इस संकट के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को निश्चिंत रहने का संदेश दिया है।
बांग्लादेश की स्थिति: 'पैनिक बाइंग' और आपूर्ति में बाधा
पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश के कई शहरों में पेट्रोल, डीजल और ऑक्टेन की भारी कमी महसूस की जा रही है। राजधानी ढाका सहित देश भर के कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई स्थानों पर लोग घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं।
बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPC) के सामने बड़ी चुनौती है, क्योंकि युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ईंधन ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालांकि, ईरान ने हाल ही में बांग्लादेश के छह ईंधन वाहक जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने पर सहमति जताई है, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जगी है। बांग्लादेश सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को अप्रैल में भी स्थिर रखा है, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति न हो पाने के कारण आम जनता परेशान है।
भारत ने कहा- चिंता की बात नहीं, हमारे पास 60 दिन का स्टॉक
एक तरफ जहाँ बांग्लादेश ईंधन संकट से जूझ रहा है, वहीं भारत ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि भारत के पास कच्चा तेल (Crude Oil) और रिफाइंड उत्पादों का लगभग 60 दिन का भंडार है। सरकार ने जोर देकर कहा है कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत की आपूर्ति व्यवस्था सुचारू है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी रहेंगी।