India-US Trade Deal 2026: भारत और अमेरिका के बीच होने वाली महत्वपूर्ण 'इंटरिम ट्रेड डील' (Interim Trade Deal) पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक टैरिफ दरों में किए गए बदलाव और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले के बाद, दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के बीच होने वाली प्रस्तावित बैठक फिलहाल टाल दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका एक अंतरिम व्यापार समझौते के करीब थे। इस समझौते के तहत, अमेरिका भारत पर लगने वाले प्रभावी टैरिफ को 50% (रूस से तेल खरीदने के कारण लगे दंड सहित) से घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ था। बदले में, भारत ने भी कुछ अमेरिकी उत्पादों पर अपनी ड्यूटी कम करने का वादा किया था।
हालांकि, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा 'इमरजेंसी पावर्स' (IEEPA) के तहत लगाए गए वैश्विक टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप के पिछले सभी टैरिफ आदेश रद्द हो गए। इसके जवाब में, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी कार्यकारी शक्तियों का उपयोग करते हुए तत्काल 15% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है।
भारत पर इसका क्या असर होगा?
18% की जगह अब 15% टैरिफ: पहले हुए समझौते के अनुसार भारत को 18% टैरिफ देना था। अब ट्रंप के नए आदेश के बाद भारत पर 15% ग्लोबल सरचार्ज लगेगा। तकनीकी रूप से यह 18% से कम है, लेकिन यह 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) दरों के ऊपर अतिरिक्त होगा, जिससे कुछ भारतीय निर्यातकों के लिए गणित उलझ सकता है।
ट्रेड डील में देरी: टैरिफ स्ट्रक्चर बदलने के कारण भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी अब नए सिरे से डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं। यही कारण है कि 23 फरवरी से वाशिंगटन में होने वाली तीन दिवसीय बैठक को आगे बढ़ा दिया गया है।
अनिश्चितता का माहौल: भारत के इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, केमिकल और रत्न-आभूषण क्षेत्र के निर्यातक इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस स्थिति का फायदा उठाना चाहिए। 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) के अनुसार, चूंकि अमेरिका में टैरिफ की कानूनी स्थिति बदल गई है, इसलिए भारत को अपनी शर्तों को और बेहतर करने के लिए बातचीत करनी चाहिए।