Meesho’s unusual and bold anchor allocation call exposes growing tensions in new-age tech IPOs

​SBI फंड्स को बड़ा हिस्सा देने पर कई दिग्गज निवेशकों ने जताया विरोध; क्या भारतीय स्टार्टअप्स की लिस्टिंग प्रक्रिया पर उठ रहे हैं सवाल?
 
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​ई-कॉमर्स कंपनी मीशो (Meesho) की प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) भारतीय पूंजी बाजार में चर्चा का केंद्र बनी हुई है, लेकिन इसकी शुरुआत एक अप्रत्याशित विवाद के साथ हुई है। मीशो के एंकर आवंटन (Anchor Allocation) को लेकर कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने विरोध जताया और कुछ ने तो आवंटन से पीछे हटने का फैसला भी कर लिया। इस घटना ने एक बार फिर न्यू-एज टेक कंपनियों के IPOs में फेयर वैल्यूएशन (Fair Valuation) और पारदर्शी आवंटन (Transparent Allocation) की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
​एंकर आवंटन IPO से पहले किया जाने वाला वह हिस्सा होता है, जो कंपनी संस्थागत निवेशकों (Qualified Institutional Buyers - QIBs) के लिए आरक्षित रखती है। यह आमतौर पर IPO खुलने से एक दिन पहले होता है और बाजार के प्रति निवेशकों के रुझान को दर्शाता है। मीशो ने इस प्रक्रिया में एक असामान्य और साहसिक कदम उठाया, जिसने वित्तीय जगत में हलचल मचा दी। जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने अपने एंकर कोटे का लगभग एक चौथाई हिस्सा (25%) देश के सबसे बड़े एसेट मैनेजर, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SBI Funds Management), को आवंटित कर दिया।
​अन्य प्रमुख घरेलू और वैश्विक फंडों को यह आवंटन पसंद नहीं आया। उनका मानना था कि इतना बड़ा हिस्सा एक ही संस्था को देना बाजार की सामान्य प्रथा के खिलाफ है और यह विशेष व्यवहार (Preferential Treatment) को दर्शाता है। कई बड़े फंडों ने विरोध के तौर पर मीशो के एंकर बुक से अपनी अर्जी वापस ले ली। सूत्रों के अनुसार, इन फंडों ने एसबीआई फंड्स के बराबर आवंटन की मांग की थी, लेकिन ऐसा न होने पर उन्होंने खुद को इस प्रक्रिया से बाहर कर लिया। यह कदम अन्य निवेशकों के बीच बढ़ती असंतोष और विरोध को स्पष्ट रूप से दिखाता है। भारतीय पूंजी बाजार में पारदर्शिता और समान अवसर की अपेक्षा रखने वाले निवेशकों के लिए यह घटना एक गंभीर संकेत है।
​मीशो का यह एपिसोड भारतीय टेक स्टार्टअप्स के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। पिछले कुछ वर्षों में, जोमैटो (Zomato), नायका (Nykaa), पेटीएम (Paytm) जैसी कई न्यू-एज कंपनियों ने आक्रामक मूल्यांकन (Aggressive Valuation) पर अपने IPO लॉन्च किए, जिसके बाद लिस्टिंग के बाद उनके शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। निवेशकों का एक बड़ा वर्ग अब इन कंपनियों के मूल्यांकन और मुनाफे की राह को लेकर कहीं अधिक संदेहशील और सतर्क हो गया है। मीशो के मामले में, आवंटन की प्रक्रिया को लेकर हुआ यह विरोध, यह दर्शाता है कि निवेशक अब केवल कंपनी के वादों पर नहीं, बल्कि उसके संचालन और लिस्टिंग की नैतिकता (Ethics) पर भी सवाल उठा रहे हैं। वे चाहते हैं कि आवंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष और तार्किक हो, न कि किसी एक पक्ष के पक्ष में झुकी हुई।
​हालांकि, इस प्रारंभिक झटके के बावजूद, मीशो का एंकर बुक एक मजबूत प्रदर्शन करने में सफल रहा। कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹2,439 करोड़ जुटाए। यह आवंटन ₹111 प्रति शेयर के ऊपरी मूल्य बैंड पर किया गया। यह दर्शाता है कि बाजार में मीशो के लिए कुल मांग (Overall Demand) बहुत मजबूत थी। एंकर बुक 30 गुना से अधिक ओवरसब्सक्राइब हुआ।
​मीशो के एंकर निवेशकों की लिस्ट में कई प्रमुख वैश्विक और घरेलू नाम शामिल हैं, जिसने बाजार को यह भरोसा दिलाया कि कंपनी की लंबी अवधि की कहानी मजबूत है। इसमें सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड GIC Pte, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), फिडेलिटी इंटरनेशनल (Fidelity International), ब्लैकरॉक इंक (BlackRock Inc.), बैली गिफोर्ड (Baillie Gifford), और घरेलू दिग्गजों में एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund), यूटीआई एमएफ (UTI MF) और टाटा एमएफ (Tata MF) जैसे नाम शामिल थे। इन दिग्गज निवेशकों की भागीदारी ने कंपनी में संस्थागत विश्वास को मजबूत किया।
​मीशो का IPO कुल ₹5,421 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें ₹4,250 करोड़ का नया इश्यू (Fresh Issue) और ₹1,171 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। कंपनी ने अपने शेयरों का मूल्य बैंड ₹105 से ₹111 प्रति शेयर तय किया है। विश्लेषकों का मानना है कि मीशो ने अपनी पिछली फंडिंग के मुकाबले अपने मूल्यांकन में केवल 19% का मामूली प्रीमियम रखा है, जो पिछली टेक IPOs की अत्यधिक आक्रामक मूल्यांकन रणनीतियों से अलग है। यह एक निवेशक-अनुकूल दृष्टिकोण है, जो कंपनी की दीर्घकालिक लाभप्रदता और यूनिट इकोनॉमिक्स में सुधार के आत्मविश्वास को दर्शाता है।
​मीशो भारत के टियर 2 और टियर 3 शहरों में सस्ते ऑनलाइन रिटेल के माध्यम से एक बड़ा उपयोगकर्ता आधार बना चुका है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 234 मिलियन वार्षिक लेनदेन करने वाले उपयोगकर्ता दर्ज किए और अपने योगदान मार्जिन (Contribution Margin) में सुधार किया है। उसने सकारात्मक मुक्त नकदी प्रवाह (Positive Free Cash Flow) भी उत्पन्न किया है। कंपनी अपनी IPO आय का उपयोग क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, मार्केटिंग और ब्रांड पहल को बढ़ावा देने और रणनीतिक अधिग्रहण के लिए करने की योजना बना रही है।

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