Mission 'Lion's Roar': कैसे 30 बमों और महीनों की जासूसी से खत्म हुआ आयतुल्लाह ख़ामेनेई का 36 साल का शासन?

28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने साझा मिशन में ईरानी सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई को मार गिराया। पढ़ें इस सीक्रेट ऑपरेशन 'Lion's Roar' की पूरी इनसाइड डिटेल्स।
 
Ayatollah Khamenei Assassination Details
मध्य पूर्व के इतिहास में 28 फरवरी 2026 की सुबह एक ऐसा मोड़ लेकर आई जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई, जो पिछले 36 वर्षों से ईरान की सत्ता के केंद्र थे, एक साझा अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए। इस मिशन को इजरायल ने 'ऑपरेशन लायंस रोर' (Operation Lion's Roar) और अमेरिका ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) नाम दिया था।
​कब और कहां हुआ हमला?
​यह हमला शनिवार, 28 फरवरी 2026 को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 09:40 बजे हुआ। निशाना था मध्य तेहरान स्थित ख़ामेनेई का सुरक्षित कंपाउंड। जिस समय हमला हुआ, उस समय ख़ामेनेई अपने शीर्ष सलाहकारों—अली शमखानी और अली लारीजानी—के साथ एक गुप्त बंकर में उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे।
​कैसे बनाया गया टारगेट: महीनों की जासूसी
​खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अचानक किया गया हमला नहीं था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और इजरायल की Mossad पिछले कई महीनों से ख़ामेनेई की हर हरकत पर नज़र रख रही थी।
​सीक्रेट मीटिंग की भनक: शनिवार की सुबह मोसाद को पुख्ता जानकारी मिली कि ख़ामेनेई अपने सुरक्षित ठिकाने से निकलकर एक विशेष मीटिंग के लिए तेहरान के एक खास कंपाउंड में पहुँच रहे हैं।
​पुष्टि का इंतज़ार: जैसे ही CIA ने इस बैठक की पुष्टि की, वैसे ही मिशन को 'ग्रीन सिग्नल' दे दिया गया। अधिकारियों का मानना था कि अगर यह मौका हाथ से निकल गया, तो ख़ामेनेई फिर से भूमिगत हो सकते हैं।
​मिशन की डिटेल्स: 30 बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल
​हमले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इजरायली लड़ाकू विमानों ने इस कंपाउंड पर करीब 30 बम गिराए।
​बंकर भेदने की तकनीक: ख़ामेनेई जिस बंकर में थे, वह जमीन की गहराई में कंक्रीट की कई परतों से सुरक्षित था। इसे भेदने के लिए विशेष 'बंकर-बस्टर' मुनिशन का इस्तेमाल किया गया।
​सटीक स्ट्राइक: हमले के बाद आसमान में धुएं का काला गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा गया। सैटेलाइट तस्वीरों में ख़ामेनेई के कार्यालय और उसके आसपास के हिस्से पूरी तरह मलबे में तब्दील नज़र आए।
​मिशन का मकसद और परिणाम
​इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले को "आतंक के अंत" की शुरुआत बताया है। इजरायल का कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी मिसाइल ताकत दुनिया के लिए "अस्तित्व का खतरा" (Existential Threat) बन गई थी, जिसे रोकना अनिवार्य था।
​ईरान में अब क्या?
ख़ामेनेई की मौत के बाद ईरान ने 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है। वर्तमान में देश की कमान संभालने के लिए एक अंतरिम 'लीडरशिप काउंसिल' बनाई गई है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और न्यायपालिका के प्रमुख शामिल हैं।