मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती आज: नोट करें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय और मंत्र

Mokshada Ekadashi katha: आज 1 दिसंबर 2025 को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी मनाई जा रही है।
 
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Mokshada Ekadashi 2025: यह तिथि अत्यधिक शुभ फलदायी मानी जाती है क्योंकि इसी दिन गीता जयंती भी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है।
​1. एकादशी और गीता जयंती का महत्व
​मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे मोक्षदा एकादशी कहा जाता है।
​मोक्षदा एकादशी: यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है। 'मोक्षदा' का अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है। इस व्रत से पितरों को भी स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
​गीता जयंती: इसी पावन तिथि पर कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने मोहग्रस्त अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। गीता जयंती ज्ञान, धर्म, और कर्मयोग के संदेशों को याद करने का अवसर है। दक्षिण भारत में इसे वैकुण्ठ एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है।
​2. शुभ मुहूर्त और तिथि
​उदया तिथि के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा।
​एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 नवंबर 2025, रात 9:29 बजे से
​एकादशी तिथि समाप्त: 1 दिसंबर 2025, शाम 7:01 बजे तक
​व्रत पारण (व्रत खोलने का समय): 2 दिसंबर 2025, सुबह 6:57 बजे से 9:03 बजे तक
​3. मोक्षदा एकादशी की सरल पूजा विधि
​मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा विधि-विधान से की जाती है।
​संकल्प और स्नान: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें। स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद हाथ में जल और फूल लेकर व्रत का संकल्प करें।
​पूजा स्थान: पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
​पूजा और भोग:
​घी का दीपक जलाएं। धूप-अगरबत्ती दिखाएं।
​भगवान को पीले फूल, तुलसी दल (तुलसी पत्र), पंचामृत, फल (विशेषकर केला), और पीली मिठाई का भोग लगाएं। तुलसी दल भोग में अवश्य शामिल करें।
​भगवान विष्णु को पीला चंदन और देवी लक्ष्मी को कुमकुम/रोली अर्पित करें।
​"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
​श्रीमद्भगवद्गीता पाठ: इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कम से कम एक अध्याय अवश्य पढ़ें या सुनें।
​आरती और दान: शाम को फिर से दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। अपनी क्षमतानुसार गरीबों और जरूरतमंदों को जल, वस्त्र या अन्य वस्तुएं दान करें।
​पारण: द्वादशी (2 दिसंबर 2025) के दिन शुभ मुहूर्त में तुलसी जल से व्रत का पारण करें।
​4. मोक्षदा एकादशी के शक्तिशाली मंत्र
​पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मूल मंत्र:
विष्णु गायत्री मंत्र:
कृष्ण मंत्र:
5. मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष उपाय
​मोक्षदा एकादशी के दिन किए गए कुछ उपाय जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लाते हैं:
​सुख-समृद्धि: भगवान विष्णु के चित्र या प्रतिमा पर सिंदूर अर्पित करें।
​धन वृद्धि: भगवान मधुसूदन को कमल गट्टे (कमल बीज) चढ़ाएं। यह आकस्मिक धन प्राप्ति का योग बनाता है।
​आत्मबल और साहस: श्री हरि को तुलसी दल अर्पित करें।
​गृह क्लेश से मुक्ति: श्री बालगोपाल को दही का भोग लगाएं।
​सौभाग्य वृद्धि: भगवान विष्णु पर हल्दी अर्पित करें।
​गीता दान: इस पवित्र दिन पर किसी मंदिर या ब्राह्मण को भोजन कराएं और श्रीमद्भगवद्गीता का दान करें।
​6. एकादशी के दिन क्या न करें
​तामसिक भोजन: एकादशी के दिन चावल, मसूर दाल, लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न करें।
​निषेध कार्य: पान का सेवन न करें। किसी की निंदा, आलोचना या अपमान न करें।
​क्रोध और झूठ: क्रोध, लोभ और झूठ बोलने से बचें।
​दिन में शयन: एकादशी के दिन दिन में सोने से बचें। रात्रि में जागरण, भजन-कीर्तन और प्रभु-स्मरण करें।
​मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती का यह महा-संयोग आध्यात्मिक उन्नति और जीवन सुधार का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।

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